यह ख़बर 08 अगस्त, 2011 को प्रकाशित हुई थी

बाजार पर नजर रख रहे हैं : आरबीआई

खास बातें

  • RBI ने कहा कि वह वैश्विक घटनाक्रम पर निगाह रखे हुये है और लगातार विदेशी विनिमय तरलता, रुपया और आर्थिक स्थिरता का आकलन कर रहा है।
मुंबई:

भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि वह अमेरिका की साख घटाने के बाद पैदा हुई स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है और उसकी निगाह इसके भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों पर पड़ने वाले प्रभाव पर है। केंद्रीय बैंक ने साथ ही यह भी संकेत दिया है कि वैश्विक घटनाक्रमों से भारत पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। रिजर्व बैंक ने कहा कि देश की समूची नीतियां और नियामक ढांचा इस तरह तैयार किया जाना चाहिए, जिससे विदेशी घटनाक्रमों के कारण पैदा हुई संकटपूर्ण वित्तीय बाजार स्थिति से बचाव किया जा सके। रिजर्व बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पिछले सप्ताह अमेरिकी अर्थव्यवस्था में हुए घटनाक्रम से अनिश्चितता और बढ़ी है। बयान में कहा गया है, रिजर्व बैंक की सभी महत्वपूर्ण संकेतकों पर निगाह है और वह रुपये, विदेशी मुद्रा की तरलता तथा वृहद आर्थिक स्थिरता पर इसके प्रभाव का लगातार आकलन करेगा। हम इस पर तेजी से कार्रवाई करेंगे। वैश्विक साख निर्धारण एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने अमेरिका की साख की रेटिंग को एएए से घटा दिया है। इससे यूरोपीय ऋण संकट से प्रभावित वैश्विक बाजारों की परेशानी और बढ़ गई है। रिजर्व बैंक ने कहा, गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में तेज गिरावट आई। और उसके बाद शुक्रवार को अमेरिका की ऋण साख को एएए से घटाकर एएप्लस कर दिया गया। दो अन्य रेटिंग एजेंसियों मूडीज और फिच ने हालांकि अमेरिका की ट्रिपल ए रेटिंग में बदलाव नहीं किया है, पर कहा है कि इसमें बदलाव किया जा सकता है। रिजर्व बैंक ने कहा, अमेरिकी साख घटाने के फैसले से पहले से संकट में फंसे वैश्विक बाजारों की परेशानी बढ़ गई है। निवेशकांे अपने पोर्टफोलियो का नए सिरे से आवंटन कर रहे हैं। केंद्रीय बैंक ने आगे कहा कि भारत इस तरह के घटनाक्रमों से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। शुक्रवार को बाजार के व्यवहार से यह संकेत मिलता है। बयान में कहा गया है, हाल में वैश्विक संकट के सबसे बुरे दौर में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रही थी, जो यह बताती है कि वैश्विक कारणांे की वजह से भारत में इससे बचाव की काफी क्षमता है। रिजर्व बैंक ने कहा कि वैश्विक घटनाक्रम की वजह से वृद्धि दर के नीचे आने का जोखम बना हुआ है, पर इसका असर सीमित ही होगा। केंद्रीय बैंक ने कहा कि तत्कालिक प्राथमिकता इस बात की है कि घरेलू बाजार में रुपये और विदेशी मुद्रा की तरलता को कायम रखा जाए, जिससे ब्याज दरों और विनियम दरों में भारी उतार चढ़ाव की स्थिति पैदा न होने पाए।


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