यह ख़बर 18 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

'सब्सिडी का बोझ ज्यादा समय तक नहीं उठा सकती अर्थव्यवस्था'

खास बातें

  • वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अर्थव्यवस्था पेट्रोलियम सब्सिडी का बोझ ज्यादा समय तक नहीं उठा सकती, इस दिशा में सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।
नई दिल्ली:

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अर्थव्यवस्था पेट्रोलियम सब्सिडी का बोझ ज्यादा समय तक नहीं उठा सकती, इस दिशा में सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वित्त प्रवाह और सब्सिडी बिल पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर से निपटने के लिए सभी भागीदारों के साथ परामर्श कर इस दिशा में ‘सुधारात्मक कदर्म’ उठाने होंगे। सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है।

उद्योगपतियों के साथ बजट बाद आयोजित एक बैठक में राजकोषीय घाटे व ईंधन सब्सिडी पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए मुखर्जी ने कहा, ‘महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि अगर कीमतें एक उचित स्तर पर नहीं आतीं तो क्या देश 10.12 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात बर्दाश्त कर सकता है। यह बड़ा सवाल हमारे इर्द-गिर्द घूम रहा है और हमें मिलकर इस मुद्दे को हल करना होगा।’

विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इस महीने की शुरुआत में 125 डालर प्रति बैरल को स्तर छू गईं। मुखर्जी ने कहा, ‘हमें कई सुझाव मिले हैं जिनपर हम काम कर रहे हैं। हमें इस मुद्दे को हल करना होगा। मैं उचित निर्णय करने में सबकी सहमति लेने के लिए सभी पक्षों को शामिल करना चाहूंगा।’

उल्लेखनीय है कि वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद सरकार डीजल, केरोसिन और रसोई गैस की कीमतें बढ़ाने से बचती रही है।

पेट्रोल की कीमतें 2010 में सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दी गईं, लेकिन डीजल की कीमतों को नियंत्रणमुक्त करने पर सरकार को अभी निर्णय लेना बाकी है।

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ऊंची सब्सिडी के चलते देश के राजकोषीय घाटे पर दबाव बढ़ा है और इसके चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के 5.9 प्रतिशत पर पहुंचने की संभावना है।