खास बातें
- भारत की वृद्धि दर 6.5 फीसद से कम होने की आशंका को खारिज करते हुए वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को कहा कि 2012-13 अर्थव्यवस्था के लिए सुधार का वर्ष रहेगा।
नई दिल्ली: भारत की वृद्धि दर 6.5 फीसद से कम होने की आशंका को खारिज करते हुए वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को कहा कि 2012-13 अर्थव्यवस्था के लिए सुधार का वर्ष रहेगा।
यहां आयकर विभाग के शीर्ष अधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को उच्च आर्थिक वृद्धि दर की राह पर वापस लाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
मुखर्जी ने कहा ‘‘हम सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं ताकि सकल घरेलू उत्पाद की लक्षित उच्च वृद्धि दर को वापस लाया जा सके। निश्चित तौर पर इसमें थोड़ा समय लगेगा लेकिन इस साल हमें इसमें सुधार की उम्मीद है।’’ वित्त वर्ष 2012-13 के बजट में सरकार ने आर्थिक वृद्धि 7.6 फीसद रहने का अनुमान लगाया है।
वित्त वर्ष 2011-12 में वृद्धि दर के नौ साल के न्यूनतम स्तर पर आ गयी और सकल घरेलू उत्पाद इससे पिछले साल की तुलना में 6.5 फीसद ही वृद्धि कर सका।
देश विदेश के आर्थिक एवं वित्तीय वातावरण की कठिनाइयों देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि और कम हो सकती है।
मुखर्जी ने घरेलू अर्थव्यवस्था की आंतरिक शक्ति को पर विश्वास जताते हुए कहा कि 2008 के वित्तीय के समय वृद्धि दर घटकर 6.7 फीसद पर आ गई लेकिन उसके बाद लगातार दो वित्त वर्ष यह 8.4 फीसद रहीं।
मुखर्जी ने कहा कि ब्याज दर में तेजी का चक्र बदल गया है, खनन क्षेत्र में वृद्धि हो रही है, निवेश में भी सुधार हो रहा है, मानसून सामान्य रहने का अनुमान और कच्चे तेल की कीमत घट रही है। उन्होंने कहा ‘‘ इस सारे तत्वों से घरेलू वृद्धि की रफ्तार में सुधार में मदद मिलनी चाहिए।’’ उन्होंने विश्वास जताया कि चालू वित्त वर्ष के दौरान 5.70 लाख करोड़ रुपए के प्रत्यक्ष कर संग्रह के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।