खास बातें
- अमेरिका की साख दर कम होने के बाद मुखर्जी ने कहा कि संकट है, लेकिन मैं बेवजह चिंतित नहीं होना चाहता, इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है।
New Delhi: वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने निवेशकों और कारोबारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि अमेरिकी सरकार की कर्ज साख रेटिंग कम होने का भारत पर कुछ असर तो होगा, लेकिन इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है, क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था की बुनियाद काफी मजबूत है। अमेरिका सरकार की साख दर कम होने से दुनियाभर के शेयर बाजारों में बढ़ी घबराहट और बिकवाली के बाद मुखर्जी ने कहा कि संकट है, लेकिन मैं बेवजह चिंतित नहीं होना चाहता, इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है। मुखर्जी ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की एक बैठक में कहा कि कुछ समस्याएं हैं और कुछ संकट भी है...विशेषकर अमेरिका की साख दर कम होने का प्रतिकूल असर होगा। उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय साख निर्धारण एजेंसी स्टैण्डर्ड एण्ड पूअर्स ने अमेरिकी सरकार की कर्ज साख की एएए रेटिंग को कम कर करके एए प्लस कर दिया है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में निवेशकों का भरोसा डगमगाएगा। मुखर्जी ने कहा कि रेटिंग कम होने से 2008 के वित्तीय संकट से जूझ रही वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति और खराब होगी। उन्होंने, हालांकि इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक धारणाएं नाकारात्मक होने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर आर्थिक वृद्धि हासिल करेगी। बंबई शेयर बाजार में सप्ताह की समाप्ति पर शुक्रवार को आखिरी समय में आए सुधार से पहले संवेदी सूचकांक 700 अंकों से भी अधिक लुढक चुका था। वैश्विक मंदी की आशंका में दुनियाभर के शेयर बाजारों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। और अब सोमवार को एक बार फिर भारी उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है। मुखर्जी ने कहा कि विकसित देशों में बनी इन धारणाओं का शुक्रवार को हमारे बाजारों पर असर हुआ, लेकिन हमने सुधार भी देखा है और यही हमारी मजबूती का परिचायक है।