खास बातें
- प्रणब ने कहा, मैं खाद्य मुद्रास्फीति को लेकर चिंतित हूं, पहले यह और जिंसों के कारण थी अब जल्दी नष्ट होने वाले उत्पादों की कीमतों के कारण है।
नई दिल्ली: महंगाई दर के लगातार ऊंचे बने रहने के बीच वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि वह खाद्य वस्तुओं की महंगाई को लेकर ज्यादा चिंतित हैं और सरकार वस्तुओं की मांग और पूर्ति में संतुलन बनाने के लिए प्रयास जारी रखेगी। मुखर्जी ने कहा कि इस समय खाद्य मुद्रास्फीति की मुख्य वजह जल्दी खराब होने वाली कृषि वस्तुओं की कीमतों में उछाल है, जबकि अनाज, दाल और तेलों के भावों में स्थिरता आ गई है। उन्होंने कहा, मैं खाद्य मुद्रास्फीति को लेकर चिंतित हूं, पहले यह और जिंसों के कारण थी अब जल्दी नष्ट होने वाले उत्पादों की कीमतों के कारण है। मुखर्जी ने कहा कि पहले खाद्य मुद्रास्फीति अनाज, दाल और खाद्य तेलों की वजह से थी, जिनके भाव अब एक तरह से स्थिर है। समग्र थोक मूल्य सूचकांक में खाद्य वस्तुओं का भारांक 14.34 प्रतिशत है। उसमें 9.5 प्रतिशत भार फल, सब्जी, दूध, मांस-मछली, अंडा और पोल्ट्री उत्पादों का है। वित्त मंत्री ने कहा, अगर प्याज 80 रुपये किलो के भाव हो जाए, तो उसका महंगाई के आंकड़ों पर असर दिखेगा ही। उन्होंने कहा, हम आगे भी आपूर्ति बढ़ाने के उपाय करते रहेंगे। उल्लेखनीय है कि खाद्य मुद्रास्फीति आठ जनवरी को समाप्त सप्ताह में 15.52 प्रतिशत थी, जबकि सकल मुद्रास्फीति दिसंबर में 8.43 प्रतिशत रही। वित्त मंत्री ने मुद्रास्फीति पर अंकुश के लिए रिजर्व बैंक द्वारा अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दरों में चौथाई प्रतिशत की वृद्धि किए जाने को सरकार की नीतियों के अनुकूल बताते स्वागतयोग्य बताया।