यह ख़बर 20 अगस्त, 2011 को प्रकाशित हुई थी

उच्च वृद्धि के लिए कठोर फैसले जरूरी : पीएम

खास बातें

  • विश्व अर्थव्यवस्था की अनिश्चितताओं के बीच प्रधानमंत्री ने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना में 9% आर्थिक वृद्धि हासिल करने के लिए कठिन निर्णय लेने होंगे।
New Delhi:

विश्व अर्थव्यवस्था की अनिश्चितताओं के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) में नौ प्रतिशत की उच्च आर्थिक वृद्धि हासिल करने के लिए हमें कठिन निर्णय लेने होंगे। चालू पंचवर्षीय योजना में औसत वार्षिक आर्थिक वृद्धि 8.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। डॉ सिंह ने शनिवार को योजना आयोग की पूर्ण बैठक का उद्घाटन करते हुए कहा, ...यदि हम कुछ कठिन निर्णय कर सकेंगे, तभी 12वीं योजना में 9 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य व्यावहारिक होगा। शनिवार की बैठक 12वीं योजना के दृष्टि-पत्र को मंजूरी देने के लिए बुलाई गई है। प्रधानमंत्री ने वंचित और गरीब तबके को साथ लेकर आगे बढ़ने वाली सरकार की प्रमुख योजनाओं को असरदार बनाने के लिए क्रियान्वयन और प्रशासन में सुधार की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा, सरकार की ये अग्रणी योजनाएं 12वीं योजना में भी जारी रहेंगी, लेकिन जैसा कि योजना दस्तावेज के प्रारूप में कहा गया है प्रभावी तरीके से योजनाओं को लागू करने के लिए इनके बेहतर क्रियान्वयन और प्रशासन पर ध्यान देना होगा।प्रधानमंत्री ने मुद्रास्फीति का दबाव कम करने के लिए कृषि उत्पादन बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण आबादी की आय बढ़ाने और मंहगाई पर अंकुश लगाने के लिए 12वीं योजना में कृषि उत्पादन में 4 प्रतिशत वृद्धि की जरूरत है। 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट शुरू होने से पहले देश की आर्थिक वृद्धि 9 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई थी, जबकि वर्ष 2008-09 में जब पूरी दुनिया वित्तीय संकट से जूझ रही थी, तब भी भारत की आर्थिक वृद्धि 6.8 प्रतिशत रही। 2009-10 में यह बढ़कर 7.6 प्रतिशत और पिछले वित्तवर्ष में आठ प्रतिशत से ऊपर निकलकर 8.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। बहरहाल, चालू वित्तवर्ष में इसके इसी स्तर के आसपास बने रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, मैं प्रसन्नता के साथ सदस्यों को यह बताना चाहता हूं कि दृष्टिपत्र में 11वीं योजना के दौरान कृषि उत्पादन में हालांकि, तीन प्रतिशत वद्धि हासिल होने की बात कही गई है, लेकिन ताजा अनुमानों के अनुसार कृषि क्षेत्र की वृद्धि 3.3 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि में कृषि क्षेत्र का योगदान 14 से 15 प्रतिशत तक है। उन्होंने कहा कि आयोग ने 12वीं योजना के दौरान आर्थिक वृद्धि के लिए 9 से 9.5 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि के अनुमान की जांच परख की है, लेकिन अंत में यह प्रस्ताव किया गया कि सरकार को 9 प्रतिशत का लक्ष्य रखना चाहिए।


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