खास बातें
- प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा है कि नौ प्रतिशत आर्थिक विकास दर का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यह संभव है।
कोलकाता: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि नौ प्रतिशत आर्थिक विकास दर का लक्ष्य वैश्विक अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात को देखते हुए बहुत महत्वाकांक्षी है, लेकिन यदि अपर्याप्त अधोसंरचना की समस्या से निपट लिया जाए और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर लिया जाए तो इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। भारतीय प्रबंधन संस्थान, कोलकाता के स्वर्ण जयंती समारोह में अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने कहा, "चूंकि हम 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में लगभग 8.2 प्रतिशत वृद्धि दर हासिल कर चुके हैं, लिहाजा ऐसा लग सकता है कि नौ प्रतिशत वृद्धि दर हासिल करना कठिन नहीं है।" प्रधानमंत्री ने कहा, "वैश्विक अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात को देखते हुए वैसे वास्तव में यह एक बहुत महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। औद्योगीकृत देशों में सम्भावनाओं और वैश्विक पूंजी बाजार पर उनके असर को लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति अनिश्चितताओं से भरी हुई है।" अमेरिकी कर्ज संकट ने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में मंदी के एक और दौर का भय बढ़ा दिया है और यूरोप ने वैश्विक शेयर बाजारों में निवेशकों के भीतर सिहरन पैदा कर दी है और एक सम्भावित मंदी की आशंका जोर पकड़ने लगी है। मनमोहन सिंह ने कहा, "हमारी अपनी अर्थव्यवस्था भी पिछले वर्ष की बनिस्बत सुस्त हुई है, और इस वर्ष की वृद्धि दर आठ प्रतिशत या इससे थोड़ी अधिक हो सकती है। ऐसे वातावरण के बावजूद हमें नौ प्रतिशत वृद्धि दर का लक्ष्य रखना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि हम आज के लिए या वर्ष के बाकी दिनों के लिए योजना नहीं बना रहे हैं। हम 2012-13 से 2016-17 तक की पांच वर्ष की अवधि के लिए योजना बना रहे हैं।" अतीत में जापान और कोरिया जैसे एशियाई देशों में रहे उच्च वृद्धि दर और पिछले दो दशक में चीनी अर्थव्यवस्था की तीव्र वृद्धि दर का जिक्र करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि अधोसंरचना बढ़ाकर और व्यापक सुधारों को लागू कर अपना देश भी तीव्र वृद्धि दर हासिल कर सकता है। सिंह ने कहा, "अपना देश अब इस समूह के एशियाई देशों के प्रदर्शन को दोहराने में सक्षम है। लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि ऐसा स्वत: और कामकाज को सामान्य तरीके से चलाते हुए सम्भव नहीं होगा। हमें नौ प्रतिशत वृद्धि दर हासिल करने के लिए कई कठिन चुनौतियों से उबरना होगा।"