मोदी ने एयरो इंडिया 2015 के 10वें संस्करण के उद्घाटन अवसर पर कहा, मजबूत रक्षा उद्योग वाला देश न सिर्फ अधिक सुरक्षित होगा, बल्कि यह आर्थिक लाभ को भी बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि यह भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र की शुरुआत का भी मंच हो सकता है।
मोदी ने कहा, यह निवेश को मजबूती, विनिर्माण को विस्तार, उद्यम को सहायता, प्रौद्योगिकी स्तर को बढ़ावा और देश में आर्थिक विकास को गति दे सकता है।
उन्होंने कहा कि इससे जुड़े कर्मचारी न सिर्फ वार्षिक रूप से करीब सात अरब डॉलर का उत्पादन करते हैं, बल्कि छोटे एवं मध्यम उद्योग की विशाल शृंखला में भी सहायता देते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र में रक्षा उद्योग अभी छोटा है और हमारे करीब 60 फीसदी रक्षा उपकरणों का आयात किया जाता है। इसके बावजूद हजारों लोगों को इसमें रोजगार मिला हुआ है।
रक्षा उपकरणों के आयात को कम करने की बात करते हुए मोदी ने कहा कि हम विदेश से अरबों डॉलर का रक्षा सामान खरीदते हैं।
उन्होंने कहा, ऐसे अध्ययन मौजूद हैं, जिसमें यह दिखाया गया है कि 20-25 फीसदी आयात की कमी भी एक लाख से 1.2 लाख अत्यधिक कौशलपूर्ण रोजगार का सृजन कर सकती है। अगर हम अगले पांच वर्षों में घरेलू उत्पादन में 40 से 70 फीसदी की वृद्धि कर सकते हैं, तो यह हमारे रक्षा उद्योग के उत्पादन को दोगुना कर देगा।
मोदी ने कहा, यही वजह है कि यह हमारे 'मेक इन इंडिया' का मुख्य हिस्सा है।
उन्होंने कहा, हमने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 49 फीसदी कर दी है। यदि इसमें उन्नत प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल होता है तो यह और बढ़ सकता है। हमने विदेशी संस्थागत निवेश में निवेश की सीमा 24 फीसदी कर दी है।