यह ख़बर 06 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

योजना आयोग ने दो शौचालयों पर खर्च किए 35 लाख, मोंटेक ने दी सफाई

खास बातें

  • गरीबी रेखा की परिभाषा को लेकर विवादों में घिरे योजना आयोग ने नई दिल्ली में दो शौचालयों के नवीनीकरण पर ही 35 लाख रुपए खर्च कर दिए।
नई दिल्ली:

गरीबी रेखा की परिभाषा को लेकर विवादों में घिरे योजना आयोग ने नई दिल्ली में दो शौचालयों के नवीनीकरण पर ही 35 लाख रुपए खर्च कर दिए। इसका खुलासा एक आरटीआई आवेदन पर मिले जवाब में हुआ है।

गरीबी रेखा के लिए 28 रुपए की आय की विवादित सीमा निर्धारित करने की बात करने वाले आयोग ने शौचालयों के नवीनीकरण पर 30 लाख रुपए खर्च किए और इसे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसा बनाया गया।

इसके अलावा करीब 5.19 लाख रुपए योजना भवन में शौचालयों के लिए ‘डोर एक्सेस कंट्रोल सिस्टम’ लगाने पर खर्च किए गए। इस प्रणाली में वही लोग शौचालयों का इस्तेमाल कर सकते हैं जिन्हें स्मार्ट कार्ड दिया गया है।

शौचालयों के नवीनीकरण पर खर्च के संबंध में यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल के आवेदन पर मिली है। सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी में बताया गया है कि योजना आयोग के अधिकारियों को 60 स्मार्ट कार्ड जारी किए गए हैं।

गरीबी रेखा निर्धारण के अलावा योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया उस समय भी आलोचना के घेरे में आए थे जब एक अखबार में आरटीआई के तहत मिली जानकारी के हवाले से खबर प्रकाशित हुयी थी कि मई और अक्तूबर, 2011 के बीच उनकी विदेश यात्रा पर रोजाना 2.02 लाख रुपए खर्च हुआ।

एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया था कि जून 2004 से जनवरी 2011 के बीच उन्होंने 42 आधिकारिक यात्राएं कीं। 274 दिनों की यात्राओं पर 2.34 करोड़ रुपए का खर्च आया। हालांकि अहलूवालिया का कहना था कि आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन के लिए विदेश दौरे अनिवार्य हैं।

दूसरी ओर, योजना आयोग ने शौचालय पर 30 लाख रुपये खर्च होने पर मीडिया में चलाई जा रही खबरों पर अपनी सफाई पेश करते हुए कहा है कि खर्च तो 30 लाख रुपये ही आए हैं लेकिन यह भ्रम पैदा किया जा रहा है कि यह राशि दो शौचालयों पर खर्च की गई है जो कि बिल्कुल गलत है। क्योंकि इन शौचालय ब्लाकों में कई सीट होने के साथ-साथ विकलांगों के लिए अलग से सुविधा है। इन ब्लाकों में से प्रत्येक को एक साथ लगभग 10 लोग इस्तेमाल कर सकते हैं।

बयान में कहा गया है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो एक रोजमर्रा का रखरखाव और नवीनीकरण है उसे फिजूल के खर्च के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। मरम्मत अथवा नवीनीकरण किए जा रहे शौचालय सार्वजनिक शौचालय ब्लाक हैं और न कि वरिष्ठ अधिकारियों अथवा सदस्यों के लिए निजी शौचालय।

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आयोग ने कहा है कि हर रोज बड़ी संख्या में लोग योजना भवन आते और काम करते हैं। हर वर्ष 1,500 से अधिक बैठकें आयोजित की जाती हैं और हजारों लोग इन सार्वजनिक शौचालयों का प्रयोग करते हैं। भवन के इन शौचालयों की खस्ता हाल के बारे में कई वर्षों से एक आम शिकायत थी। यह शिकायत योजना भवन में आने वाले मंत्रियों और विदेशी आगंतुकों द्वारा ही नहीं की गई थी बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों और पत्रकारों ने भी की थी।