खास बातें
- केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि मीडिया में प्रसारित किए गए ‘राडिया टेप’ में जोड़तोड़ की गई थी और इनके लीक के लिए काई सरकारी एजेंसी जिम्मेदार नहीं है।
नई दिल्ली: केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि मीडिया में प्रसारित किए गए ‘राडिया टेप’ में जोड़तोड़ की गई थी और रिकॉर्ड की गई इन टेलीफोन वार्ताओं के टेप के लीक के लिए काई सरकारी एजेंसी जिम्मेदार नहीं है।
उद्योगपति रतन टाटा की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूति जी एस सिंघवी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष दाखिल मोहरबंद गोपनीय रिपोर्ट में सरकार ने टैप की गई टेलीफोन वार्ताओं के प्रसारित अंशों के बारे में ये दावे किए है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उस समय कंपनियों के लिए लॉबिंग का काम करने वाली नीरा राडिया की टेलीफोन बातचीत टैप (बीच में रिकॉर्ड) करने में दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों समेत आठ से दस एजेंसियां शामिल थीं। मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ ने सरकार की इस रपट के कुछ शुरुआती पृष्ठों को देखा है, जिसमें कहा गया है कि मीडिया में प्रसारित वार्ता के टेपों में जोड़ घटाव किए गए हैं। रिपोर्ट का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति सिंघवी ने कहा कि बातचीत के शुरुआती और अंतिम अंश मूल टेप से मेल नहीं खाते हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि जो सरकारी अधिकारी मामले की जांच से जुड़े थे उन्हें जानकारी नहीं है कि ये टेप किसने लीक किए। खंडपीठ ने कहा, ‘‘यह संभव है कि ऐसा किसी और ने किया हो।’’