खास बातें
- इसमें यह प्रावधान भी है कि किसी भी एनबीएफसी की 25 फीसदी या इससे अधिक हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए आरबीआई की अनुमति लेनी होगी।
मुम्बई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों के लिए नई नीति का प्रस्ताव रखा। इसके विभिन्न प्रावधानों में यह भी है कि किसी भी गैर-बैंकिंग कम्पनी (एनबीएफसी) की 25 फीसदी या इससे अधिक हिस्सेदारी के अधिग्रहण या विलय के लिए आरबीआई की अनुमति लेनी होगी। रिलायंस कैपिटल, बजाज फाइनेंस और श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस देश की कुछ प्रमुख गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियां हैं। एनबीएफसी सेक्टर से सम्बंधित मुद्दों पर विचार करने के लिए गठित आरबीआई की एक कार्यसमिति की रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि पंजीकृत एनबीएफसी की 25 फीसदी या उससे अधिक शेयर धारिता के प्रत्यक्ष या परोक्ष हस्तांतरण, नियंत्रण में बदलाव, विलय या अधिग्रहण के लिए आरबीआई से पहले अनुमति ली जानी चाहिए। आरबीआई की पूर्व उप गवर्नर उषा थोरट इस समिति की अध्यक्ष थीं। वह अभी सेंटर फॉर एडवांस्ड फाइनेंसियल रिसर्च एंड लर्निग (सीएएफआरएएल) की निदेशक हैं। एनबीएफसी गैर-बैंकिंग संस्था होती है। यह विभिन्न वर्गों के ग्राहकों को ऋण देती हैं। आम लोगों से पैसे जुटाने के लिए एनबीएफसी का आरबीआई में पंजीकृत होना अनिवार्य है। सुझाव के तहत आरबीआई को उन्हीं एनबीएफसी को पंजीकृत करना चाहिए, जिनके पास न्यूनतम 50 करोड़ रुपये की सम्पत्ति है। इसके साथ ही आम लोगों से पैसे नहीं जुटाने वाली एनबीएफसी को पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट दी जा सकती है, बशर्ते उनकी सम्पत्ति का आकार 1,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं हो।