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खास बातें
- चिदंबरम ने अखबारों में छपे नरेंद्र मोदी के उन दावों को गलत बताया है, जिनमें अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौर में देश की आर्थिक विकास की दर औसतन 8.4 फीसदी बताई गई है।
नई दिल्ली: वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने अखबारों में छपे बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के उन दावों को गलत बताया है, जिनमें अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौर में देश की आर्थिक विकास की दर औसतन 8.4 फीसदी बताई गई है। वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने एक लिखित बयान जारी कर कहा है कि इससे बड़ा झूठ कुछ और नहीं हो सकता।
चिदंबरम के बयान में 1998−99 से लेकर 2003−04 तक हर साल देश की आर्थिक विकास दर दिखाई गई है। इसके मुताबिक, औसत विकास दर :-
-1998−99 में 6.7
-1999−00 में 7.6
-2000−01 में 4.3
-2001−02 में 5.5
-2002−03 में 4.0
-2003−04 में 8.1
चिदंबरम ने कहा है कि इसके मुताबिक, वाजपेयी सरकार के छह साल के दौर में देश की आर्थिक विकास दर छह फीसदी रही जबकि यूपीए सरकार के पहले दौर में यह 8.4 फीसदी रही और यूपीए के दूसरे दौर के पहले चार साल में यह औसतन 7.3 फीसदी रही।
चिदंबरम ने आगे यह भी जिक्र किया है कि इस सदी की शुरुआत से लेकर अब तक आर्थिक विकास के लिहाज से दो सबसे बुरे दौर 2000−01 और 2002−03 रहे, जिनमें आर्थिक विकास दर 4.3 फीसदी और 4 फीसदी रही।
चिदंबरम ने कहा है कि अगर आर्थिक विकास के लिहाज से स्वर्णिम काल रहा है तो वह यूपीए सरकार का पहला पांच साल का दौर है।
बयान के अंत में चिदंबरम ने इस बात पर हैरानी जताई है कि नरेंद्र मोदी इस तरह आंकड़ों के साथ फर्जी मुठभेड़ क्यों कर रहे हैं, क्योंकि आखिरकार सच्चाई तो सामने आएगी ही।
चिदंबरम के जवाब में बीजेपी के दौर में वित्त और विदेशमंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने कहा कि चिदंबरम आंकड़ों की बाजीगरी कर रहे हैं। यशवंत सिन्हा ने कहा कि एनडीए के दौर में छह करोड़ नए रोजगार के अवसर पैदा हुए जबकि यूपीए के दौर में सिर्फ 27 लाख नौकरियां ही हुई हैं। यशवंत सिन्हा ने यह भी कहा कि जब एनडीए का दौर खत्म हुआ तो देश की आर्थिक विकास दर 8.6 थी, जबकि आज विकास दर 4.8 है। चिदंबरम इसकी तुलना क्यों नहीं कर रहे हैं। चिदंबरम महंगाई की बात क्यों नहीं कर रहे हैं।