खास बातें
- विशेषज्ञों की मानें तो बाजार में जरूरत से अधिक हो चुकी बिकवाली के मद्देनजर शुरुआत में कुछ तेजी देखी जा सकती है।
New Delhi: वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका के बीच इस सप्ताह शेयर बाजार की चाल सुस्त रहने की संभावना है। हालांकि, विशेषज्ञों की मानें तो बाजार में जरूरत से अधिक हो चुकी बिकवाली के मद्देनजर शुरुआत में कुछ तेजी देखी जा सकती है। शेयर ब्रोकिंग फर्म आईआईएफएल के अनुसंधान प्रमुख अमर अंबानी का कहना है कि अल्पकाल में परिदृश्य धुंधला है, जिसकी वजह घरेलू एवं विदेशी बाजारों में ढेरों समस्याओं का होना है। इस सप्ताह केवल तीन कारोबारी सत्र पड़ेंगे और निचले स्तर पर कुछ तेजी दर्ज की जा सकती है, लेकिन यह अनुमान लगाना मुश्किल होगा कि बाजार में तेजी किस स्तर पर लौटती है। 31 अगस्त को ईद और 1 सितंबर को गणेश चतुर्थी है। मंगलवार को सरकार पहली तिमाही के जीडीपी वृद्धि दर के आंकड़े जारी करेगी, जिससे 16 सितंबर को होने वाली रिजर्व बैंक की बैठक में नीतिगत दरों पर आरबीआई के रुख का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी। घरेलू तथा वैश्विक स्तर पर नकारात्मक समाचारों के चलते बंबई शेयर बाजार में गिरावट का दौर लगातार पांचवें सप्ताह भी जारी रहा और बीएसई सेंसेक्स बीते शुक्रवार को 16,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 15,848.83 अंक पर बंद हुआ। इसके अलावा 26 अगस्त को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष के बयान से पहले भी स्टोरियों ने सतर्क रवैया अपनाते हुए मुनाफावसूली पर जोर दिया। इस तरह से सेंसेक्स लगातार पांच कारोबारी हफ्तों में 2,873.47 अंक या 15.35 प्रतिशत टूटा है। इसी तरह निफ्टी में इन पांच हफ्तों में 886.15 अंक या 15.73 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। बाजार सूत्रों का कहना है कि शेयर बाजारों में इस गिरावट का कारण मुख्यत: विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा बिकवाली पर जोर दिया जाना है। 26 अगस्त तक के अस्थाई आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 3,315.85 करोड़ रुपये और निकाले हैं और मौजूदा महीने में कुल मिलाकर वे 11,400 करोड़ रुपये पहले ही निकाल चुके हैं। मुद्रास्फीति 13 अगस्त को समाप्त सप्ताह में बढ़कर 9.80 प्रतिशत हो गई।