खास बातें
- अमेरिकी सरकार की ऋण साख दर कम होने के बाद सोमवार को शेयर बाजार में कारोबार शुरू होने पर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
नई दिल्ली: साख निर्धारण एजेंसी स्टैण्डर्ड एण्ड पूअर्स द्वारा अमेरिकी सरकार की ऋण की साख दर कम कर दिए जाने के बाद सोमवार को शेयर बाजार में कारोबार शुरू होने पर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। पूंजी बाजार से जुड़े विशेषज्ञों ने ऐसी आशंका व्यक्त की है। अशिका स्टॉक ब्रोकर के शोध प्रमुख पारस बोथरा ने कहा कि साख निर्धारक एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स द्वारा अमेरिका की ऋण साख घटाए जाने के कारण बाजार में गिरावट का दौर देखने को मिल सकता है लेकिन यह गिरावट बाजार के लड़खड़ाने जैसी स्थिति नहीं पैदा करेगी। स्टैंडर्ड एण्ड पूअर्स ने अमेरिकी सरकार की एएए सावरेन क्रेडिट रेटिंग को कम कर आंका है। यह ऐसा विकासक्रम है जिसने इस चिंता को पैदा किया है कि निवेशकों का विश्वास अर्थव्यवस्था में घटेगा। इस खबर के बाद एशिया सहित वैश्विक बाजारों में जोरदार गिरावट देखने को मिली। भारत में निवेशकों की चौतरफा बिकवाली से बीएसई सूचकांक में कारोबार के अंत में आए मामूली सुधार से पहले 700 से भी अधिक अंकों की गिरावट आई थी। बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों पर आधारित सूचकांक 387.31 अंक अथवा 2.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,305.87 अंक पर बंद हुआ। एडेलविस सिक्योरिटीज ने एक शोध परिपत्र में कहा कि कुल मिलाकर जोखिम आस्तियां विशेषकर उभरते बाजार इक्विटी में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा जिसका कारण अमेरिका और यूरोप का ऋण संकट है। इसके कारण भारत में भी बाजार धारणा प्रभावित होने की संभावना है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति बाजार के लिए लंबे समय में वरदान भी साबित हो सकती है क्योंकि भारत की बुनियाद सुदृढ़ है और यहां अधिक पूंजी अंत:प्रवाह है। इसके अलावा डालर के मुकाबले भारतीय रुपये की मजबूती उत्प्रेरक का काम कर सकती है।