यह ख़बर 06 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

भारत में ऋण संकट का जोखिम अन्य देशों की तुलना में कम

खास बातें

  • भारत में ऋण संकट का जोखिम अन्य विकसित देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम है। वित्त मंत्रालय के एक स्थिति पत्र में यह बात कही गई है।
नई दिल्ली:

भारत में ऋण संकट का जोखिम अन्य विकसित देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम है। वित्त मंत्रालय के एक स्थिति पत्र में यह बात कही गई है।

मंगलवार को जारी इस स्थिति पत्र में कहा गया है, ‘विकसित या उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में ऋण जोखिम के मामले में भारत की स्थिति अच्छी है।’ इसमें कहा गया है कि 2008 के वित्तीय संकट के बाद कई देशों को ऋण के निपटान में दिक्कत आ रही है, वहीं दूसरी ओर भारत ने बड़े ऋण को घरेलू वित्त पोषण से बाजार में किसी तरह की अड़चन डाले बिना निपटा दिया है।

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भारत सरकार का सामान्य ऋण मार्च, 2011 के अंत तक सकल घरेलू उत्पाद के 66.4 प्रतिशत पर था। वहीं विनियम दरों के आधार पर सरकार का विदेशी ऋण जीडीपी का 3.6 फीसद था। इस तरह कुल ऋण 5.4 प्रतिशत बैठता है।