खास बातें
- सोने की निवेश के लिए जबर्दस्त मांग को देखते हुए इस साल सोने का आयात 1,000 टन का स्तर पर कर जाने की संभावना है।
मुंबई: भले ही सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं, निवेश के लिए इसकी जबर्दस्त मांग को देखते हुए इस साल सोने का आयात 1,000 टन का स्तर पर कर जाने की संभावना है। अमेरिकी सावरेन ऋण की रेटिंग घटाए जाने और यूरोपीय संघ के देशों में ऋण संकट गहराने के बाद से अकेले इसी महीने सोने की कीमतों में 14 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। इससे पहले, किसी एक महीने में सोने की कीमतें 1999 में 14 प्रतिशत से अधिक बढ़ी थीं। घरेलू बाजार में वायदा बाजार में सोना 28,150 रुपये प्रति 10 ग्राम की नई ऊंचाई को छू गया, जबकि वैश्विक बाजार में यह गत शुक्रवार को 1,877 डालर प्रति औंस के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया। ब्रोकरेज फर्म माया आयरन ओर्स के वाइस चेयरमैन प्रवीण कुमार ने बताया, कीमतें बढ़ने के साथ निवेश मांग खासकर गोल्ड ईटीएफ में निवेश की मांग बढ़ने की संभावना है। कुमार ने कहा कि देश का कुल गोल्ड ईटीएफ निवेश 15 टन पर पहुंच गया है जिसके एक साल में दोगुना होने की उम्मीद है। हालांकि, आभूषण की मांग नरम पड़ने के आसार हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, भारत ने 2010 में 958 टन सोने का आयात किया था। वहीं इस साल के पहले छह महीने में आयात पहले ही 553 टन को पार कर चुका है। कुमार के विचारों से सहमति जताते हुए जियोजित कामट्रेड के वरिष्ठ विश्लेषक आनन्द जेम्स ने कहा कि चूंकि निवेश की मांग जबर्दस्त है, सोने का आयात 1,000 टन का स्तर पार कर सकता है।