यह ख़बर 20 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

जी-20 ने भारत की चिंताओं का समर्थन किया

खास बातें

  • उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बुनियादी ढांचों के लिए धन के अभाव और तमाम देशों द्वारा अपनाए जा रहे सादगी के उपायों को लेकर भारत की चिंता का जी-20 के नेताओं ने समर्थन किया है।
लॉस कैबोस (मैक्सिको):

उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बुनियादी ढांचों के लिए धन के अभाव और तमाम देशों द्वारा अपनाए जा रहे सादगी के उपायों को लेकर भारत की चिंता का जी-20 के नेताओं ने समर्थन किया है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी-20 शिखर सम्मेलनों में बुनियादी ढांचे के लिए धन की दीर्घकालिक सुलभता पर लगातार जोर देते आ रहे हैं। पहली बार उन्होंने यह मुद्दा सियोल में जी-20 के पांचवे शिखर सम्मेलन में उठाया था और उसके बाद फिर कान्स में।

प्रधानमंत्री यह भी कहते आ रहे हैं कि अधिशेष राष्ट्रों को चाहिए कि वे कर्ज से दबे देशों में राजकोषीय दूरदर्शिता और सादगी के साथ सामंजस्य बिठाते हुए नपातुला राजकोषीय विस्तार करें। प्रधानमंत्री के इस रुख को मंगलवार को सम्पन्न हुए जी-20 के इस सातवें शिखर सम्मेलन में जारी हुए एक दस्तावेज में अंतत: समर्थन मिला है। इस दस्तावेज को औपचारिक रूप से जी-20 के नेताओं का घोषणा पत्र कहा गया है।

जी-20 के घोषणा पत्र में कहा गया है, "सतत आर्थिक विकास, गरीबी उन्मूलन और रोजगार सृजन के लिए बुनियादी ढाचे में निवेश जरूरी है।" घोषणा पत्र में कहा गया है कि इस संदर्भ में बहुपक्षीय विकास बैंकों द्वारा की गई सिफारिशों को लागू किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने दस्तावेज पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "घोषणा पत्र संकेत करता है कि बहुपक्षीय विकास बैंकों को इस उद्देश्य के लिए मजबूत किया जाना चाहिए। हम जी-20 के देशों की बचनबद्धता को खास कार्रवाई में रूपांतरित करने के लिए मिलकर काम करेंगे।"

जी-20 के सामान्य सत्र के दौरान अपने सम्बोधन में मनमोहन सिंह ने कहा कि चूंकि भारत जैसे विकासशील देश वैश्विक आर्थिक संकट के नकारात्मक असर के कारण गंभीर समस्याओं का पहले से सामना कर रहे हैं, लिहाजा उनके पास विकास के लिए बहुत कम धन है।

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मनमोहन सिंह ने कहा, "इस संदर्भ में विकासशील देशों में बुनियादी ढाचों में निवेश विशेष महत्व रखता है। यह दीर्घकाल के लिए तीव्र विकास की बुनियाद रखता है, तथा मांग का एक मजबूत स्रोत उपलब्ध कराकर उनकी अर्थव्यवस्थाओं को तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी तत्काल प्रोत्साहन मुहैया कराता है।" लेकिन प्रधानमंत्री ने कहा कि यह तभी संभव है, जब विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को इस तरह के निवेश के वित्तपोषण के लिए दीर्घकालिक पूंजी प्राप्त हो, जो कि कठिन है, क्योंकि पूंजी प्रवाह अवरुद्ध बना हुआ है।