खास बातें
- श्रमिक संगठनों ने सरकार से कहा है कि लगातार बढ़ती मुद्रास्फीति को अंकुश में रखने के लिए खाद्य पदार्थों के वायदा कारोबार पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए।
New Delhi: श्रमिक संगठनों ने सरकार से कहा है कि लगातार बढ़ती मुद्रास्फीति को अंकुश में रखने के लिए खाद्य पदार्थों के वायदा कारोबार पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए। वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी के साथ बुधवार को यहां हुई बजट पूर्व बैठक में श्रमिक संगठनों ने उद्योग जगत को दिए जा रहे प्रोत्साहन पैकेज को रोजगार के अवसरों के साथ जोडने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उद्योगों को प्रोत्साहन और रियायतें उनकी रोजगार की योजना के साथ जुडी होनी चाहिए। वित्तमंत्री को बजट पूर्व दिए गए संयुक्त ज्ञापन में श्रमिक संगठनों ने यह भी मांग की है कि बड़े औद्योगिक घरानों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को खुदरा व्यापार और बैंकिंग क्षेत्र में उतरने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस :सीटू: के महासचिव तपस सेन ने बैठक के बाद प्रतीक्षारत संवाददाताओं को बताया सभी श्रमिक संगठनों ने एक स्वर में महंगाई को नियंत्रित करने की मांग की है। यदि आप :सरकार: महंगाई को थामने के प्रति गंभीर हैं तो फिर उपभोक्ता वस्तुओं में होने वाले वायदा कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाइए। वर्तमान में चावल, तुर और उडद आदि दालों के वायदा कारोबार पर रोक लगी है। चीनी वायदा पर भी रोक थी लेकिन इस महीने उसे उठा लिया गया। संगठनों ने आयकर छूट सीमा को भी मौजूदा 1.60 लाख रुपये से बढाकर तीन लाख रुपये करने और आवास, चिकित्सा और शिक्षा सुविधाओं को वेतनेत्तर लाभ कर :एफबीटी: के दायरे से बाहर करने की मांग की। संगठनों ने गरीबों और आम आदमी तक सस्ता अनाज पहुंचाने के लिये सार्वजनिक वितरण प्रणाली :पीडीएस: को मजबूत बनाने की भी सिफारिश की है। भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष गिरीश अवस्थी ने कहा हमने मूल्य वृद्धि पर ज्ञापन दिया है। हमने कहा है कि आवश्यक वस्तुओं की मूल्यवृद्धि रुकनी चाहिये और राशन व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए। इससे पहले वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुये उनसे रोजगार के अवसर बढ़ाने में उनके सुझाव मांगे। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास के लिये आर्थिक वृद्धि के साथ साथ रोजगार सृजन में वृद्धि जरुरी है। उन्होंने कहा कि हमें युवा भारत की उम्मीदों और आशाओं पर भी खरा उतरना है। मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने गरीबी दूर करने और रोजगार बढाने के लिये बहुआयामी नीति अपनाई है। ऐसी नीति जिसमें गरीबों को स्वास्थ्य, शिक्षा सुलभ कराने और कौशल विकास के जरिये उनके सशक्तिकरण पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन में कौशल विकास का व्यापक कार्यक्रम चलाया गया है और इसके जरिये 2022 तक 50 करोड लोगों को कुशल एवं प्रशिक्षित बनाये जाने का लक्ष्य है। रोजगार के मोर्चे पर मुखर्जी ने कहा कि श्रम ब्यूरो की जुलाई-सितंबर 2010 की रिपोर्ट के अनुसार कपडा, आईटी.बीपीओ, आटोमोबाईल और धातु क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढे हैं।