खास बातें
- चालू वित्त वर्ष के लिए तय 40 हजार करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और शेयर बाजारों में गिरावट के रुख को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए तय 40 हजार करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है। सूत्रों के अनुसार योजना आयोग की हुई पूर्ण बैठक में वित्त मंत्रालय की तरफ से इस तरह का संकेत दिया गया। सूत्रों के अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में जब दुनियाभर के शेयर बाजारों में गिरावट का रुख बना हुआ है सरकार सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए आगे नहीं आएगी, क्योंकि इससे उसे उपयुक्त दाम नहीं मिलेंगे। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने भी लोकसभा में इस तरह का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों में सरकारी हिस्सेदारी बेचने का यह उपयुक्त समय नहीं है। उन्होंने कहा कि विनिवेश पर निर्णय लेते समय सरकार बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखेगी। अमेरिकी अर्थव्यवस्था और यूरोपीय देशों के कर्ज संकट को लेकर बढ़ती चिंताओं से विकसित देशों के बाजारों में भारी गिरावट का रुख है। बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स भी 16,141.67 अंक पर टिका है। पिछले वित्त वर्ष में भी सरकार ने 40,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा था और कोल इंडिया के आईपीओ में अपार सफलता मिलने के बाद भी सरकार वर्ष के दौरान 23,000 करोड़ रुपये ही जुटा पाई थी।