खास बातें
- वैश्विक मांग में कमी तथा घरेलू औद्योगिक वृद्धि में नरमी के चलते देश का निर्यात इस साल मई में 4.16 प्रतिशत घटकर 25.68 अरब डॉलर रह गया।
नई दिल्ली:
वैश्विक मांग में कमी तथा घरेलू औद्योगिक वृद्धि में नरमी के चलते देश का निर्यात इस साल मई में 4.16 प्रतिशत घटकर 25.68 अरब डॉलर रह गया।
इस दौरान देश का आयात और अधिक तेजी से 7.36 प्रतिशत घटकर 41.9 अरब डॉलर रह गया। इसे अर्थवयवस्था विशेषकर निवेश में नरमी का संकेत माना जा सकता है क्योंकि संयंत्रों पर मशीनरी आने की दर आठ प्रतिशत घटी।
अस्थाई आकडों के अनुसार आलोच्य महीने में व्यापार घाटा घटकर 16.3 अरब डॉलर रहा जो पिछले महीने 18.5 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव एसआर राव ने कहा कि हमने औद्योगिक उत्पादन सूचकांक आईआईपी आंकड़े भी देखे हैं। तो आप जोड़कर देख सकते हैं कि निर्यात का प्रदर्शन क्यों अच्छा नहीं रहा। उल्लेखनीय है कि सरकार ने हाल ही में घोषित विदेश व्यापार नीति में मौजूदा वित्त वर्ष में निर्यात 20 प्रतिशत बढाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। राव ने कहा कि कोई समाधान ढूंढने के लिए अपनी रणनीति को फिर से तय कर रहा है।
निर्यात के मोर्चे पर यह खराब प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जबकि अप्रैल में औद्योगिक उत्पादन सिर्फ 0.1 प्रतिशत बढा़। राव ने कहा कि विशेषकर यूरो क्षेत्र अर्थव्यवस्थाओं जैसे भारत के पारंपरिक बाजारों में मांग में कमी का असर निर्यात पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम संकट से बाहर नहीं है और यूनान तथा स्पेन को राहत पैकज का मामला अभी काम जारी होने वाला है।
मई में पेट्रोलियम उत्पादों, अभियांत्रिकी सामान, रत्न एवं आभूषण तथा रेडीमेड गारमेंट जैसी प्रमुख जिंसों का निर्यात अपेक्षाकृत कम रहा। आयात के मद में सोने व चांदी का आयात भी कम रहा।
पिछले वित्त वर्ष में 300 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य को छूने के बाद देश ने 2012-13 में 360 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य तय किया है।
इस साल अप्रैल में 24.4 अरब डॉलर का निर्यात किया गया था। इस प्रकार से अप्रैल-मई 2012-13 के दौरान कुल 50.13 अरब डॉलर का निर्यात किया गया है जो कि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 50.48 अरब डॉलर के मुकाबले थोड़ा कम है।
अप्रैल-मई 2012-13 के दौरान कुल 79.8 अरब डॉलर का आयात किया गया जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 81.87 अरब डॉलर के मुकाबले 2.42 प्रतिशत कम है।