खास बातें
- निर्यात मोर्चे पर अच्छे प्रदर्शन के कारण देश का मौजूदा चालू खाते का अंतर 3.5 प्रतिशत से कम रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।
New Delhi: दिसंबर महीने में वस्तुओं के निर्यात में अच्छी खासी वृद्धि देश के चालू खाते के लिए बहुत अच्छा संबल दे सकती है। दिसंबर 2010 में देश के वस्तुओं के निर्यात में 36 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर के अनुसार 200 अरब डॉलर के लक्ष्य के विपरीत देश का निर्यात मौजूदा वित्त वर्ष में 215-225 अरब डालर रहने का अनुमान है। खुल्लर ने कहा, दिसंबर माह में निर्यात 22.5 अरब डॉलर का रहा, जो 33 माह की सर्वाधिक राशि है, जबकि इस दौरान आयात 11.1 प्रतिशत सिकुड़ गया और व्यापार अंतर तीन साल के निम्नतम स्तर 2.5 अरब डॉलर पर आ गया। अप्रैल-दिसंबर 2010-11 में निर्यात 29.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि आयात में 19 प्रतिशत की तेजी आई, जिससे कुल व्यापार घाटा 120 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि पूर्व में यह 135 अरब डॉलर अनुमानित था। निर्यात मोर्चे पर अच्छे प्रदर्शन के कारण देश का मौजूदा चालू खाते का अंतर 3.5 प्रतिशत से कम रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि चालू खाता घाटा जीडीपी का 3.7 प्रतिशत रहेगा। जुलाई-सितंबर तिमाही में देश का चालू खाता घाटा 72 प्रतिशत बढ़कर 15.8 अरब डॉलर हो गया था।