खास बातें
- प्रणब ने कहा कि प्रत्यक्ष कर संहिता एक अप्रैल 2012 से लागू होगी। इसमें कर की दर घटाकर और अधिक लोगों तथा कम्पनियों को इसके दायरे में लाया गया है।
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि बहु प्रतीक्षित प्रत्यक्ष कर संहिता एक अप्रैल 2012 से लागू होगी। इसमें कर की दर घटाकर और अधिक लोगों तथा कम्पनियों को इसके दायरे में लाकर कर कानूनों को आसान बनाया गया है। मुखर्जी ने कहा, "प्रस्तावित प्रत्यक्ष कर संहिता में प्रत्यक्ष कर से सम्बंधित नीतिगत पहल को एक साथ लाया गया है और इसे अगले कारोबारी साल से लागू करना तय किया गया है।" मुखर्जी ने चौथे 'अंतर्राष्ट्रीय कर वार्ता वैश्विक सम्मेलन' को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रस्तावित सुधार का उद्देश्य कर व्यववस्था को साधारण बनाना और इसे अधिक सुसंगत बनाकर इसका आधार बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि कर सुधार 1990 के दशक में शुरू हुए देश के आर्थिक सुधार और उदारीकरण प्रक्रिया के मूल में था। उल्लेखनीय है कि देश की कर व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार आयकर अधिनियम, 1961 को हटाकर उसकी जगह नई व्यवस्था 'प्रत्यक्ष कर संहिता' लागू करना चाहती है। अप्रत्यक्ष कर में देश भर में मौजूद असमानताओं को हटाने के लिए सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने का प्रस्ताव रखा है। मुखर्जी ने सम्मेलन में मौजूदा विकासशील व्यक्तिगत आय कर प्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देश की प्रत्यक्ष कर वसूली 1996-97 से 2010-11 की अवधि में 8.62 अरब डॉलर से करीब 10 गुणा बढ़कर 87 अरब डॉलर हो गई है। इस प्रणाली में विभिन्न वर्गो के बीच असमानताओं को समाप्त करने की कोशिश की गई है। मुखर्जी ने कर चोरी और विदेशी बैंकों में पैसे जमा करने की अवैध प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई और कहा कि केंद्र सरकार ने इस पर लगाम कसने के लिए पांच सूत्री रणनीति अपनाई है। इस रणनीति में शामिल हैं काले धन के खिलाफ वैश्विक कदमों का साथ देना, उपयुक्त कानूनी ढांचा बनाना, अवैध धन पर नजर रखने के लिए संस्थान की स्थापना, कार्यान्वयन की पद्धति तय करना और प्रभावी कार्य के लिए मानव शक्ति को प्रशिक्षित करना।