यह ख़बर 20 अगस्त, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'अमेरिकी, यूरोपीय संकट का असर भारत पर भी'

खास बातें

  • अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में छाई मंदी का असर भारतीय बाजारों पर भी हो रहा है, जिससे निवेशकों को नुकसान हो रहा है।
नई दिल्ली:

अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में छाई मंदी का असर भारतीय बाजारों पर भी हो रहा है, जिससे निवेशकों को नुकसान हो रहा है। लेकिन यदि संकट लम्बे समय तक बरकरार रहता है तो देश इससे निपटने में पूरी तरह सक्षम है। ये बातें केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर डी. सुब्बाराव और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन के साथ बैठक के दौरान कही। बैठक हाल के सप्ताहों में भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली को देखते हुए वैश्विक आर्थिक स्थिति की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी। बैठक के दौरान मुखर्जी ने कहा, "अमेरिका और यूरोप में बाजार की स्थिति का असर लघु अवधि के लिए ही सही, हमारे बाजारों पर भी हो रहा है।" बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि देश के महत्वपूर्ण आर्थिक नीति-निर्माताओं के साथ चर्चा में अमेरिका की धीमी आर्थिक वृद्धि और यूरोपीय देशों में कर्ज सम्बंधी चिंताओं पर चर्चा की गई। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, "देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। मौजूदा हालात में यह और अधिक मजबूत बनकर उभरेगी। ऐसे में जबकि बड़ी अर्थव्यवस्थाएं संकटग्रस्त हैं, भारत इस समस्या से निपटने के लिए दूसरे देशों की तुलना में कहीं अधिक क्षमतावान है।" मुखर्जी ने यह भी कहा कि भारतीय शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाव दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कहीं कम है। भारतीय बाजारों के बेंचमार्क सूचकांक में शुक्रवार को करीब दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एशिया के दूसरे बड़े बाजारों में यह चार से छह प्रतिशत रहा।


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