देश के किसानों की वित्तमंत्री से छोटी से उम्मीद.
नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2023 (Budget 2023) जल्द पेश होने वाला है. 1 फरवरी को केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट 2023-24 पेश करेंगी. अलग अलग सेक्टर के लोगों की अपनी अपनी अपेक्षाएं हैं. ऐसे में सूत्रों के हवाले से खबर है कि सरकार का इस बजट में किसानों और ग्रामीण इलाकों पर जोर दिखने वाला है. बावजूद इसके देश के किसानों की शिकायत दशकों से जस की तस बनी हुई है. बजट से पहले कुछ किसानों से बात की गई ताकि उनकी अपेक्षाओं और आशाओं को समझा जा सके.
मोदीनगर के गोदाना गांव के किसान हुस्न सिंह कहते हैं कि गन्ने की फसल की पेमेंट समय पर नहीं मिल पा रही है, महंगाई बढ़ने से खर्चा काफी बढ़ गया है. हुस्न सिंह ने कहा, "पिछले साल जो चारा 6 रुपये किलो मिलता था. अब 18 रुपये किलो मिल रहा है पशुपालन करना मुश्किल हो रहा है. गन्ने की फसल का बकाया पिछले साल अप्रैल से अब तक नहीं मिल पाया है पैसे नहीं मिलने पर गांव के साहूकार से कर्ज लेना पड़ता है. साहूकार हर महीने 100 रुपये पर 5 रुपये की दर से पैसे लेता है. मुझे पीएम किसान योजना का भी फायदा नहीं मिल रहा है."
किसान अरुण के पास करीब 5 बीगा जमीन है. वे कहते हैं कि मंडियों में MSP रेट नहीं मिल रहा है. व्यापारी कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर करते हैं. किसान हरिंदर नेहरा का कहना है कि हम चाहते हैं वित्त मंत्री किसानों को उनकी फसल का समय पर सही तरीके से भुगतान करा दें. सरकारी रेट पर ही हमें अपनी फसल की कीमत मिल जाए. अगर यह मिल जाए तो हमें सरकार से किसी तरह के अनुदान की जरूरत नहीं है. किसान स्वाभिमानी होते हैं. सरकार को किसानों का दर्द समझना चाहिए.
किसानों का कहना है कि अधिकतर लोग जो किसानी से जुड़े हुए हैं वे चाहते हैं कि सरकार की जो घोषणाएं और योजनाएं किसानों के लिए तय हैं वह सही मायने में जमीनी स्तर पर बिना किसी अवरोध के पहुंचें. कुल मिलाकर किसान चाहते हैं कि वित्त मंत्री बजट 2023 में कृषि और ग्रामीण भारत के विकास के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाने के साथ साथ एक नया रोडमैप भी पेश करें जिससे किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य मिल सके.