खास बातें
- भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि खुले बांड बाजार में उसके द्वारा की जाने वाली खरीद फरोख्त उसकी मौद्रिक नीति का हथियार है।
मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि खुले बांड बाजार में उसके द्वारा की जाने वाली खरीद फरोख्त उसकी मौद्रिक नीति का हथियार है और इसको सरकारी ऋण के प्रबंध या बांड की कीमतों को प्रभावित करने वाले कदम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रिजर्व बैंक के उपगवर्नर सुबीर गोकर्ण ने गुरुवार को कहा, ओएमओ मौद्रिक नीति का हथियार है और इसका ऋण प्रबंधन से लेनादेना नहीं है। उन्होंने कहा कि ओएमओ का इस्तेमाल बांड से मुनाफे को प्रभावित करने के लिए नहीं किया जाता। गोकर्ण ने कहा कि ओएमओ का इस्तेमाल स्थायित्व वाले तरीके से होना चाहिए, इससे मुनाफे को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। सांविधिक तरलता अनुपात :एसएलआर: के बारे में गोकर्ण ने कहा कि केंद्रीय बैंक का मानना है कि इससे फिलहाल छेड़छाड़ करने की जरूरत नहीं है। फिलहाल एसएलआर 24 प्रतिशत पर है। रिजर्व बैंक ने दिसंबर, 2010 में एसएलआर को 25 से घटाकर 24 प्रतिशत कर दिया था। 25 जनवरी को महंगाई पर अंकुश के प्रयासों के तहत केंद्रीय बैंक ने रेपो और रिवर्स रेपो दरों में चौथाई-चौथाई फीसद की वृद्धि की थी।