यह ख़बर 04 मई, 2012 को प्रकाशित हुई थी

60 फीसदी ग्रामीण आबादी 35 रुपये में करती है गुजर-बसर

खास बातें

  • राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन के महानिदेशक की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रति व्यक्ति दैनिक व्यय के लिहाज से ग्रामीण इलाकों में यह करीब 35 रुपये और शहरी इलाकों में 66 रुपये बैठता है।
नई दिल्ली:

भारत की 60 फीसदी ग्रामीण आबादी 35 रुपये प्रति दिन और लगभग इतने ही लोग शहर में 66 रुपये प्रतिदिन के खर्च पर गुजर-बसर करते हैं। यह बात आय और व्यय से जुड़े सरकारी सर्वेक्षण में कही गई है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) के महानिदेशक जे दास ने अपनी रिपोर्ट के आमुख में लिखा, औसतन प्रति व्यक्ति दैनिक व्यय के लिहाज से ग्रामीण इलाकों में यह करीब 35 रुपये और शहरी इलाकों में 66 रुपये बैठता है। करीब 60 फीसदी आबादी शहरी और ग्रामीण इलाकों में इतने खर्च अथवा इससे कम पर जीवन निर्वाह करती है।

एनएसएसओ के जुलाई, 2009 और जून, 2010 के दौरान हुए 66वें सर्वेक्षण के मुताबिक अखिल भारतीय औसत मासिक प्रति व्यक्ति उपभोक्ता व्यय (एमपीसीई) का स्तर ग्रामीण इलाकों में 1,054 रुपये और शहरी इलाकों में 1,984 रुपये रहा है। सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि ग्रामीण इलाकों में सबसे निचले पायदान पर 10 फीसदी आबादी ऐसी भी है, जो 15 रुपये प्रति दिन पर जीवन यापन कर रही है, जबकि शहरी इलाके में यह आंकड़ा इससे मामूली बेहतर 20 रुपये प्रति दिन का है।

इसमें कहा गया, भारत की ग्रामीण आबादी में सबसे गरीब 10 प्रतिशत जनसंख्या 453 रुपये औसत मासिक प्रतिव्यक्ति उपभोक्ता व्यय पर गुजर-बसर कर रहे हैं। जबकि शहर के 10 फीसदी सबसे गरीब लोग 599 रुपये औसत मासिक प्रतिव्यक्ति उपभोक्ता खर्च यानी एमपीसीई कर जीवन यापन कर रहे हैं।

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

एनएसएसओ सर्वेक्षण में जाहिर किया गया है कि ग्रामीण इलाके का एमपीसीई सबसे कम बिहार और छत्तीसगढ़ में 780 रुपये पर था, जिसके बाद 820 रुपये के साथ ओडिशा और झारखंड का स्थान रहा। अन्य राज्यों में केरल का एमपीसीई सबसे अधिक 1,835 रुपये और पंजाब व हरियाणा का एमपीसीई क्रमश: 1,649 रुपये और 1,510 रुपये रहा।