- केंद्र सरकार का बजट 2026-27 युवाओं को रोजगार, कौशल विकास और अवसर प्रदान करने पर केंद्रित है.
- सर्विस सेक्टर को भविष्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख इंजन मानते हुए रोजगार बढ़ाने के लिए रणनीति बनाई गई है.
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आक्रामक निवेश से नई तकनीकी उद्योगों और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा.
केंद्र सरकार ने इस बार का केंद्रीय बजट 2026‑27 ऐसे समय में पेश किया है जब देश की युवा आबादी नौकरी, स्किल और अवसरों को लेकर पहले से ज्यादा अपेक्षाएं रखती है. इसी वजह से बजट में स्पष्ट संदेश नजर आता है-युवा मांगे मोर, और सरकार उसे पूरा करने के लिए सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग और स्किलिंग पर आक्रामक निवेश कर रही है.
युवा फोकस क्यों?
बजट में कई संकेत मिले कि सरकार नई अर्थव्यवस्था में युवाओं को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना चाहती है-
- बजट ने 'जॉब्स, स्किलिंग और एम्प्लॉयबिलिटी' को मुख्य प्राथमिकता बताया.
- सरकार शिक्षा‑से‑रोजगार कड़ी को मजबूत करने के लिए नए इंस्टीट्यूशनल मैकेनिज़्म बनाएगी और हाई‑पोटेंशियल सर्विस सब‑सेक्टर्स को पहचानने का काम भी बड़े स्तर पर होगा.
- युवाओं के लिए सर्विस सेक्टर आधारित ग्रोथ मॉडल को अगले दशक की सबसे बड़ी रणनीतिक दिशा बताया गया है.
- इस स्पष्ट फोकस के चलते बजट युवाओं को रोजगार और भविष्य की स्किल के लिहाज से बड़ा 'डिलीवरी बजट' बन गया है.
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सर्विस सेक्टर पर बड़ा दांव: इसीलिए युवाओं को उम्मीदें
सरकार ने सर्विस सेक्टर को भविष्य की ग्रोथ का इंजन मानते हुए कई बड़े कदम उठाए-
बजट ने सेवाओं को ग्रोथ ड्राइवर बताया और टूरिज़्म, डिजिटलीकरण और ज्ञान‑आधारित सेवाओं में नौकरी के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया. एक हाई‑लेवल Education‑to‑Employment कमेटी बनाई जाएगी, जो बताएगी कि सर्विस सेक्टर की कौन‑सी ब्रांच आने वाले वर्षों में सबसे ज्यादा नौकरियां देगी.
साफ है कि इस बार सर्विस सेक्टर सिर्फ 'एक सेक्टर' नहीं, बल्कि युवाओं के लिए एक बड़े रोजगार‑पुल जैसी भूमिका में है.
सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा निवेश
केंद्रीय बजट 2026-27 में सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए बड़े निवेश की घोषणा की गई है. मुख्य रूप से, बायोफार्मा सेक्टर को वैश्विक हब बनाने के लिए अगले 5 वर्षों में ₹10,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा, जिससे नई दवाओं के शोध और उत्पादन को बल मिलेगा. इसके अतिरिक्त, MSMEs के लिए ₹10,000 करोड़ के स्पेशल ग्रोथ फंड की भी घोषणा हुई है.
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मैन्युफैक्चरिंग को टर्बोचार्ज: युवाओं के लिए नई इंडस्ट्रीज में मौके
बजट 2026 को 'धुरंधर बजट' कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि मैन्युफैक्चरिंग पर जितना आक्रामक निवेश इस बार दिखा, वह पिछले कई वर्षों से अधिक व्यापक है-
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग, बायोफार्मा SHAKTI, रेयर अर्थ मैग्नेट्स मिशन, केमिकल पार्क, कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल इंटीग्रेटेड प्रोग्राम. ये सभी स्कीमें भारत को हाई‑टेक इंडस्ट्री सुपरपावर बनाने का रोडमैप हैं. बजट में कहा गया कि देश की ग्रोथ का सबसे बड़ा लक्ष्य 'मैन्युफैक्चरिंग को गहराई देना और आयात निर्भरता कम करना' है.
इसका सीधा असर रोजगार पर पड़ेगा- युवाओं के लिए हाई‑स्किल और मिड‑स्किल दोनों तरह की नौकरियों में तेज इजाफा होगा.
MSMEs और स्किलिंग को भी बड़ी ताकत
MSMEs को बढ़ावा देने के लिए नीति‑समर्थन, आसान क्रेडिट और टेक्नोलॉजी एडॉप्शन पर जोर दिया गया. यह छोटे‑मझोले कारोबारों में रोजगार बढ़ाने की बड़ी रणनीति है. इंडस्ट्री 4.0 स्किलिंग, लॉजिस्टिक्स मॉडर्नाइज़ेशन और बड़े‑पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर निजी व सरकारी क्षेत्र एक साथ काम करेंगे.
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बजट क्यों है ‘धुरंधर'?
कुल मिलाकर बजट 2026 की खासियत यह है कि यह रोजगार, क्षमता निर्माण, नवाचार और दीर्घकालिक ग्रोथ पर एक ही साथ काम करता है. इसमें सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग दोनों मोर्चों पर ऐसी पहलें हैं जिनसे युवा भारतीय को अगले 5–10 वर्षों में सबसे तेज अवसर मिलेंगे.
बजट का चरित्र स्पष्ट रूप से रीफॉर्म‑ड्रिवन, भविष्य‑केन्द्रित और ग्रोथ‑ओरिएंटेड है.
यानी न तो यह केवल घोषणाओं का बजट है और न ही केवल राहत का- यह एक धुरंधर, स्ट्रक्चरल और अग्रेसिव बजट है, जो युवा भारत को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है.














