Ghaziabad: NH-24, दुहाई, मुरादनगर, मोदीनगर... अब किधर बढ़ने वाला है गाजियाबाद शहर

Ghaziabad Expand: जानें गाजियाबाद 2.0 का भविष्य. मास्टर प्लान 2031, NH-24, और RRTS कैसे बदल रहे हैं शहर का नक्शा. मुरादनगर और मोदीनगर की ओर बढ़ते 'ग्रेटर गाजियाबाद' की पूरी कहानी

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Ghaziabad Development Plan: गाजियाबाद शहर किस ओर विस्‍तार ले रहा है.

Ghaziabad Expansion: NCR के इंदिरापुरम में रहने वाले मेरे ऑफिस के एक साथी से फोन पर जब भी रिश्‍तेदार पूछते हैं कि कहां रहते हो, तो उसका जवाब होता है- दिल्‍ली. वो ये नहीं कहता कि वो जहां रहता है, वो इलाका गाजियाबाद में आता है. वैसे, आपका गाजियाबाद दिल्‍ली से कम है क्‍या? दिल्‍ली के गाजीपुर से जरा सा आगे निकलें कि गाजियाबाद का कौशांबी या इंदिरापुरम शुरू. आनंद विहार की सीमा से आगे गाजियाबाद शुरू. उत्तर पूर्वी दिल्‍ली का दिलशाद गार्डन, आगे बढ़ते ही गाजियाबाद का शालीमार गार्डन और साहिबाबाद शुरू. गोकलपुरी या खजूरी खास तक दिल्‍ली और जरा सा आगे बढ़ते ही लोनी बॉर्डर यानी गाजियाबाद शुरू. 

दिल्‍ली से सटे ये वो इलाके हैं, जिन्‍हें ज्‍यादातर लोग गाजियाबाद नहीं, बल्कि दिल्‍ली से ही जोड़कर देखते हैं. आप ही सोचकर देखिए न, राजधानी दिल्‍ली से सटा शहर, जिसे कुछ साल पहले तक 'अफोर्डेबल', 'किफायती' या सस्‍ता विकल्‍प कहा जाता था, वो आज वैसा रहा है क्‍या? एक-डेढ़ दशक पहले के गाजियाबाद की कल्‍पना कीजिए और आज की तस्‍वीर देखिए. एकदम ही अलग पाएंगे, जनाब! 

हिंडन के किनारों से शुरू हुआ ये शहर अब दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और RRTS यानी रैपिड रेल की रफ्तार पर सवार होकर मीलों आगे निकल रहा है. गाजियाबाद अब नोएडा और गुरुग्राम की तर्ज पर एक व्यवस्थित 'प्रीमियम रियल एस्टेट हब' में तब्दील हो रहा है. ये बढ़ा जा रहा है, बस बढ़ा ही जा रहा है. 

NDTV की स्‍पेशल सीरीज 'नोएडा@50 सीरीज' के तहत हमने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और न्‍यू नोएडा की कहानी बताई, भविष्‍य की तस्‍वीर दिखाई. अब गाजियाबाद के लिए हम वैसी ही कहानी लेकर आए हैं, अपनी खास सीरीज 'ग्रेटर गाजियाबाद' में. 

मास्टर प्लान 2031: मुरादनगर-मोदीनगर... और किधर बढ़ रहा शहर 

मास्टर प्लान 2031 के साथ गाजियाबाद अब एक नई करवट ले रहा है. NH-24 की चौड़ी सड़कें, दिल्‍ली-मेरठ RRTS की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और मुरादनगर-मोदीनगर की ओर भागता शहर एक सुनहरे भविष्य की कहानी बयां कर रहा है. यूपी सरकार अब मुरादनगर के पास करीब 20 से 27 गांवों को मिलाकर एक नया 'ग्रेटर गाजियाबाद' विकसित कर रही है, जो आने वाले दशक में इस पूरे क्षेत्र का आवासीय और औद्योगिक केंद्र बनेगा.

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गाजियाबाद का अगला और सबसे बड़ा विस्तार उत्तर-पूर्व की ओर हो रहा है. मास्टर प्लान 2031 के तहत लोनी, मुरादनगर और मोदीनगर को शहर के नए शहरी दायरे में शामिल किया गया है. पहले चरण में मुरादनगर के आसपास के करीब 20 से 27 गांवों को शहरी प्लानिंग का हिस्सा बनाया जा रहा है, जिसमें खोड़ा, लोनी और डासना नगर पंचायतों के क्षेत्र भी शामिल होंगे.

इस विस्तार के बाद गाजियाबाद की आबादी करीब 16 लाख से बढ़कर 25 लाख तक पहुंचने का अनुमान है. शहर का दायरा बढ़ने के साथ ही यहां वार्डों की संख्या भी 100 से बढ़कर 214 तक हो सकती है. यह योजना न केवल आबादी के दबाव को कम करेगी, बल्कि अनियोजित विकास को रोककर नए व्यवस्थित सेक्टरों की नींव रखेगी.

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गाजियाबाद अब ‘अफोर्डेबल हाउसिंग' से आगे बढ़कर एक एस्पिरेशनल मार्केट बन रहा है, जहां विकास का बड़ा हिस्सा दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के आसपास हो रहा है. बेहतर कनेक्टिविटी के चलते दिल्ली की दूरी करीब 30 मिनट रह गई है, जिससे घरों की मांग तेजी से बढ़ी है. अब यहां बड़े 4BHK और लग्जरी घरों की मांग बढ़ रही है, जहां कीमतें 3 करोड़ से 6 करोड़ रुपये तक पहुंच रही हैं. नोएडा से भी खरीदार अब गाजियाबाद की ओर रुख कर रहे हैं

मनोज गौड़

CMD, गौड़ ग्रुप

एनएच-24: गाजियाबाद का 'नोएडा मॉडल'

एनएच-24 (दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे) अब गाजियाबाद की ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बन चुका है. यह कॉरिडोर अब सिर्फ एक 'ट्रांजिट रूट' नहीं रहा, बल्कि लाइफस्टाइल और प्रीमियम हाउसिंग का नया ठिकाना बन गया है.

हिंडन एयरपोर्ट की नजदीकी और वेव सिटी, सिद्धार्थ विहार जैसे इलाकों में तेजी से बनते टाउनशिप ने यहां निवेश के नजरिए को बदल दिया है. प्रॉपइक्विटी की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 5 सालों में यहां प्रॉपर्टी की कीमतों में करीब 139% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है.

आज का खरीदार सिर्फ सस्ता घर नहीं चाहता, बल्कि अच्छी लाइफस्टाइल भी चाहता है. एनएच-24 ऐसा कॉरिडोर है जहां ये संतुलन अभी भी संभव है. यहां इंटीग्रेटेड टाउनशिप और गेटेड कम्युनिटी अब सामान्य हो गए हैं. क्लब हाउस, हरियाली और रिटेल स्पेस जैसी सुविधाएं अब बेसिक जरूरत बन चुकी हैं. खास बात यह है कि ये सभी सुविधाएं अभी भी ऐसी कीमतों पर मिल रही हैं, जो NCR के दूसरे हिस्सों में एंट्री लेवल मानी जाएंगी. 

अमित मोदी

डायरेक्टर, काउंटी ग्रुप

ग्रेटर गाजियाबाद और नए हॉटस्पॉट्स

गाजियाबाद का नक्शा अब पुराने शहर से निकलकर नए कॉरिडोर पर शिफ्ट हो चुका है. साल 2026 में निवेश के लिए कुछ इलाके 'हॉटस्पॉट' बनकर उभरे हैं:

  • सिद्धार्थ विहार: एनएच-24 पर स्थित यह इलाका प्रीमियम लिविंग का नया केंद्र है.
  • वेब सिटी: आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ तेजी से विकसित होता टाउनशिप.
  • हरनंदीपुरम: GDA की नई टाउनशिप योजना, जो 521 हेक्टेयर जमीन पर विकसित होगी.
  • दुहाई-मोदीनगर (RRTS बेल्ट): हाई-स्पीड ट्रेन के चलते यहां रेंटल और रेजिडेंशियल डिमांड में उछाल है.
गाजियाबाद में सबसे बड़ा बदलाव कनेक्टिविटी का है. NH-24 और RRTS के चलते अब यहां एंड-यूजर के साथ निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ी है, जिससे यह मार्केट और मजबूत होता दिख रहा है. गाजियाबाद का मास्टर प्लान 2031 शहर को बेतरतीब से प्लान्ड ग्रोथ की ओर ले जा रहा है. 

यश मिगलानी

MD, मिगसन ग्रुप

कनेक्टिविटी: विस्तार की असली चाबी

गाजियाबाद के विस्तार की कहानी अधूरी है अगर इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर की बात न हो. एनएच-24 के चौड़ीकरण और आरआरटीएस (नमो भारत) ट्रेन ने इस शहर को दिल्ली और मेरठ के बेहद करीब ला दिया है. ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे ने लॉजिस्टिक्स और उद्योगों के लिए नए दरवाजे खोले हैं. जानकारों का मानना है कि 'ग्रेटर गाजियाबाद' आने वाले समय में नोएडा और गुरुग्राम को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार है.

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अंसल हाउसिंग के डायरेक्‍टर कुशाग्र अंसल कहते हैं कि NH-24 कॉरिडोर में जिस तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी विकसित हुई है, उसने इस क्षेत्र को निवेश और एंड-यूजर, दोनों के लिए बेहद मजबूत विकल्प बना दिया है. आज खरीदार भविष्य की ग्रोथ और लाइफस्टाइल को ध्यान में रखकर निर्णय ले रहे हैं. आने वाले समय में यहां प्रॉपर्टी वैल्यू और रेंटल डिमांड में स्थिर बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.

बदलता ट्रेंड: 'अफोर्डेबल' से 'एस्पिरेशनल' की ओर

अब गाजियाबाद का खरीदार 2BHK के बजाय 3BHK और 4BHK जैसे बड़े फ्लैट्स की तलाश कर रहा है. सिद्धार्थ विहार और राजनगर एक्सटेंशन जैसे इलाकों में गेटेड कम्युनिटी का बढ़ता चलन इस बात का प्रमाण है कि लोग अब सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं के साथ समझौता नहीं करना चाहते.

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एनएच-24 कॉरिडोर तेजी से एक लाइफस्टाइल डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है. RRTS जैसे प्रोजेक्ट्स ने इस क्षेत्र को लेकर खरीदारों का नजरिया पूरी तरह बदल दिया है. सिद्धार्थ विहार अब प्रीमियम लिविंग का नया केंद्र बनता जा रहा है, जहां जागरूक खरीदार निवेश कर रहे हैं. यह ट्रेंड डेवलपर्स को बेहतर लाइफस्टाइल वाले प्रोजेक्ट्स बनाने का मौका दे रहा है. .

प्रतीक तिवारी

MD, प्रतीक ग्रुप

गाजियाबाद 2.0 का भविष्य

अगले 10 साल गाजियाबाद के लिए 'गेम चेंजर' साबित होने वाले हैं. शहर अब अपनी पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर दासना, मुरादनगर और मोदीनगर तक फैल चुका है. जिस तरह नोएडा का विस्तार एक्सप्रेसवे के किनारे हुआ, गाजियाबाद का भविष्य अब मास्टर प्लान 2031 और नए इकोनॉमिक कॉरिडोर तय कर रहे हैं. ये शहर हाई-ग्रोथ और ग्लोबल स्टैंडर्ड वाला 'महानगर' बनने की राह पर है.

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