न LPG, न PNG! इस कंपनी ने बनाया पानी से चलने वाला चूल्‍हा, किचन में लगा डाला तो लाइफ झिंगालाला, कीमत जान लीजिए

Water powered Stove: इस चूल्‍हे को बस 100 ML पानी चाहिए. ये चूल्‍हा, अपनी जरूरत के अनुसार इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से हाइड्रोजन गैस बनाता है. जैसे ही आप इसका नॉब घुमाएंगे, हाइड्रोजन बनना शुरू हो जाएगा.

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Water Stove, Water Cooktop: भारतीय स्‍टार्टअप कंपनी ने बनाया ऐसा चूल्‍हा, जिसे जलाने के लिए न PNG की जरूरत होगी, न LPG की जरूरत.

Water Based Cooktop or Stove: देश में तेल-गैस की चिंता के बीच एक भारतीय स्‍टार्टअप कंपनी ने ऐसा चूल्‍हा तैयार किया है, जो पानी से चलेगा. चौंक गए न? हमने भी पहली बार सुना तो विश्वास नहीं हो रहा था. फिर हमने इसे तैयार करने वाली कंपनी, जो कि भारतीय स्‍टार्टअप है- 'ग्रीनवाइज' (Greenvize), उसकी वेबसाइट पर गए. सर्च किया, खंगाला और आपके लिए पूरी जानकारी लेकर आए हैं. दरअसल, ग्रीनवाइज ने हाइड्रोजन आधारित कुकटॉप पेश किया है. पानी से चलने वाला ये कॉम्पैक्ट कुकटॉप हाइड्रोजन को ईंधन के तौर पर इस्‍तेमाल करता है. इस कुकटॉप को एक बार किचन में लगा लिया तो सालों-साल  LPG, PNG की टेंशन दूर हो जाएगी. कंपनी ने घरेलू और व्‍यवसायिक, दोनों तरह के इस्‍तेमाल के लिए चूल्‍हा लॉन्‍च किया है. 

पानी से चलने वाला ये चूल्‍हा कैसे काम करता है, इसकी कीमत कितनी है और जलाने में खर्च कितना आता है, ये तमाम जानकारी हम यहां दे रहे हैं. 

कैसा है ये हाइड्रोजन वाला चूल्‍हा? 

इस चूल्‍ह के सिस्टम में कुकिंग यूनिट के भीतर ही एक PEM यानी प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन इलेक्ट्रोलाइजर लगाया गया है, जो पानी से तुरंत हाइड्रोजन पैदा करता है. इस इनोवेशन की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें गैस स्टोरेज या डिस्ट्रिब्‍यूशन के लिए अलग से किसी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर की जरूरत नहीं पड़ती है. सामान्‍य तौर पर गैस चूल्‍हे, सिलेंडर और पाइपलाइन पर निर्भर रहती हैं, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं चाहिए. यानी कि ये अपने आप में पूरी तरह आत्मनिर्भर और परफेक्‍ट सॉल्‍युशन बन जाता है.  

ये चूल्‍हा काम कैसे करता है?

जैसा कि आप जानते हैं क‍ि पानी हाइड्रोजन और ऑक्‍सीजन से मिलकर बना है. इसके इलेक्ट्रोलिसिस प्रोसेस में पानी के अणु फिर से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में टूट जाते हैं. इस चूल्‍हे के सिस्‍टम में भी ऐसा ही होता है. PEM इलेक्ट्रोलाइजर से इलेक्ट्रोलिसिस की प्रक्रिया के दौरान, यहां भी पानी के अणु हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में टूट जाते हैं. इसी हाइड्रोजन का इस्‍तेमाल पकाने के ईंधन के रूप में किया जाता है. 

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ये चूल्‍हा, अपनी जरूरत के अनुसार इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से हाइड्रोजन गैस बनाता है. जैसे ही आप इसका नॉब घुमाएंगे, हाइड्रोजन बनना शुरू हो जाएगा.

अब आप सोचेंगे कि हाइड्रोजन तो ईंधन के रूप में इस्‍तेमाल हो गया, ऑक्‍सीजन का क्‍या हुआ! तो जान लीजिए कि इसके बाय-प्रोडक्‍ट (By-product) के रूप में पानी का भांप निकलता है और ऑक्‍सीजन आपके किचन, आपके घर के वातावरण में शामिल हो जाता है. यानी एयर क्‍वालिटी भी सुधर जाती है. 

इस चूल्‍हे को जलाने में खर्च कितना आता है? 

ग्रीनवाइज एनर्जी सॉल्यूशन के फाउंडर संजीव चौधरी का दावा है कि इस उपकरण को 6 घंटे तक लगातार चलाने के लिए केवल 100 मिली डिस्टिल्ड वॉटर जरूरी होगा. आप RO वाले पानी का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं. वहीं 1 किलोवाट बिजली की जरूरत होगी. 

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एक स्‍टैंडर्ड इंडक्शन कुकटॉप आमतौर पर प्रति बर्नर 1.5 से 2 किलोवाट बिजली का उपयोग करता है, जो 6 घंटे में लगभग 9 से 12 यूनिट बिजली की खपत करता है.  इसके उलट ग्रीनवाइज का कुकटॉप 6 घंटे की कुकिंग के लिए पर्याप्त हाइड्रोजन बनाने के लिए केवल 1 यूनिट (1 kWh) बिजली की खपत करता है.

अब चूल्‍हे की कीमत भी जान लीजिए 

कंपनी ने फिलहाल सिंगल और डबल-बर्नर कुकटॉप लॉन्च किए हैं. सिंगल-बर्नर हाइड्रोजन स्टोव की कीमत लगभग 1,05,000 रुपये और डबल-बर्नर की कीमत 1,50,000 रुपये रखी गई है. इसमें GST शामिल नहीं है. संजीव चौधरी ने बताया कि इस सिस्टम को सोलर रूफटॉप सेटअप के साथ जोड़ा जा सकता है. ऐसा करने पर ग्रीन एनर्जी के जरिये पूरा खाना बनेगा. ये फिलहाल कुछ ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म पर एवलेबल हैं. जल्‍द ही भारतीय बाजार में उपलब्ध होंगे. 

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