- जनवरी महीने में शाकाहारी थाली की कीमत में पिछले साल की तुलना में एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है.
- मांसाहारी थाली की कीमत में सात प्रतिशत की कमी आई है जिससे खाने की लागत कम हुई है.
- प्याज और आलू की कीमतों में गिरावट से शाकाहारी थाली सस्ती होने में मदद मिली है.
महंगाई के मोर्चे पर आम आदमी के लिए अच्छी खबर आई है. जनवरी के महीने में घर पर बनी शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही थालियों की कीमत में पिछले साल के मुकाबले कमी देखी गई है. क्रिसिल (CRISIL) इंटेलिजेंस की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सब्जियों और दालों के दाम गिरने की वजह से खाने की लागत कम हुई है. यह रिपोर्ट उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो पिछले काफी समय से किचन के बढ़ते बजट से परेशान थे.
शाकाहारी और मांसाहारी थाली के दामों में कितनी गिरावट?
क्रिसिल के लेटेस्ट फूड कॉस्ट इंडीकेटर के मुताबिक, जनवरी में शाकाहारी थाली की कीमत पिछले साल की तुलना में 1 प्रतिशत घटी है. वहीं, मांसाहारी थाली खाने वालों को और भी ज्यादा फायदा हुआ है, क्योंकि इसकी कीमत में 7 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. शाकाहारी थाली के सस्ता होने के पीछे मुख्य वजह प्याज, आलू और दालों की कीमतों में आई भारी कमी को माना जा रहा है.
टमाटर ने बिगाड़ा स्वाद, प्याज और आलू ने दी राहत
भले ही थाली सस्ती हुई है, लेकिन टमाटर की कीमतों में बढ़ोतरी ने इस राहत को थोड़ा कम कर दिया. रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 में टमाटर 31 रुपये किलो था, जो जनवरी 2026 में 50 प्रतिशत बढ़कर 46 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया. टमाटर की आवक में 39 प्रतिशत की कमी इसकी मुख्य वजह रही.
दूसरी ओर , प्याज की कीमतों में 27 प्रतिशत और आलू की कीमतों में 23 प्रतिशत की जोरदार गिरावट आई है, जिससे आम आदमी को बड़ी राहत मिली है.
दालों के दाम क्यों गिरे और क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर पुष्पन शर्मा ने बताया कि स्टॉक ज्यादा होने की वजह से प्याज और दालों की कीमतों में नरमी आई है. इस साल दालों की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले 14 प्रतिशत की कमी देखी गई है. इसकी सबसे बड़ी वजह विदेशों से होने वाला भारी आयात है.
बंगाल चना (काले चने) का आयात पिछले साल के मुकाबले 9 गुना बढ़ गया है, जबकि पीली मटर और उड़द दाल के आयात में भी भारी बढ़ोतरी हुई है. सरकार ने इन आयातों को मार्च 2026 तक जारी रखने की मंजूरी दी है.
गैस और तेल की महंगाई ने रोकी ज्यादा गिरावट
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अगर गैस और तेल के दाम न बढ़ते, तो थाली और भी सस्ती हो सकती थी. सोयाबीन तेल की वैश्विक सप्लाई कम होने से वनस्पति तेल की कीमतें 4 प्रतिशत बढ़ गई हैं. साथ ही, एलपीजी सिलेंडर की कीमतों (LPG Price)में भी सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इन कारणों की वजह से थाली की लागत में होने वाली बड़ी गिरावट थोड़ी सीमित रह गई.













