यूएस ट्रेड डील से गारमेंट कारोबारी झूमे, 5 सालों में एक्सपोर्ट 30 बिलियन होने की उम्मीद

नोएडा के एक्सपोर्ट यूनिट्स में अब फिर से मशीनों की गूंज बढ़ने वाली है. बजट रेट वाले टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ने से हजारों नौकरियों के नए अवसर पैदा होंगे.

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भारत और अमेरिका के बीच हुआ नया व्यापार समझौता भारतीय गारमेंट इंडस्ट्री के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है. एनडीटीवी ने नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर के अध्यक्ष ललित ठुकराल इस बारे में बातचीत की. उन्होंने इसे फादर ऑफ ऑल ट्रेड डील बोलते हुए कहा है कि यह समझौता ना केवल डूबते हुए छोटे कारोबारियों को सहारा देगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की धाक जमाएगा.

टैरिफ की जंग में भारत की बड़ी जीत

ललित ठुकराल ने कहा, "हम पिछले 6 महीने से 50% रिसिप्रोकल टैरिफ का असर झेल रहे थे. लेकिन अब भारत-अमेरिका व्यापार समझौता हमारे लिए बड़ी राहत लेकर आया है. हमारा आंकलन है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की वजह से भारत से गारमेंट का एक्सपोर्ट मौजूद 16 बिलीयन डॉलर से बढ़कर अगले 6-7 साल में 30 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है."

अमेरिका ने चीन (34%), वियतनाम (20%) और बांग्लादेश (20%) के मुकाबले भारत पर सबसे कम (18%) रिसिप्रोकल टैरिफ लगाया है. इससे अमेरिकी मॉल और स्टोर्स में भारतीय कपड़े अब चीन और बांग्लादेश से ज्यादा सस्ते और कॉम्पिटेटिव होंगे.

डबल होगा एक्सपोर्ट का आंकड़ा

ललित ठुकराल के अनुसार, नोएडा में अमेरिका एक्सपोर्ट करने वाले छोटे गारमेंट कारोबारी आर्थिक संकट झेल रहे थे. कुछ फैक्ट्रियां बंद भी हुई थी. अब जल्दी ही बंद पड़े छोटे एक्सपोर्ट यूनिट फिर से खुलेंगे और सस्ते रेट पर एक्सपोर्ट होने वाले टेक्सटाइल प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट फिर शुरू होगा.

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नोएडा के एक्सपोर्ट यूनिट्स में अब फिर से मशीनों की गूंज बढ़ने वाली है. बजट रेट वाले टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ने से हजारों नौकरियों के नए अवसर पैदा होंगे. साफ है यह ट्रेड डील भारतीय बुनकरों और व्यापारियों के लिए सुनहरे दिन लेकर आई है.

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