अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ सौलर प्रोडक्ट्स पर करीब 126% तक का अतिरिक्त टैक्स (countervailing duty) लगा दिया है.अमेरिका ने कहा है कि भारत अपने सौर कंपनियों को अनुचित सब्सिडी दे रहा है, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हो रहा है.
क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, यह एक्शन सिर्फ भारत पर ही नहीं, बल्कि इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सौर सेल और मॉड्यूल पर भी अलग-अलग टैरिफ लगाए हैं. मालूम हो कि यह 126% टैरिफ उस 10% अतिरिक्त शुल्क के ऊपर लगेगा, जो अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में सभी देशों से होने वाले आयात पर लागू किया है.
आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में भारतीय सौर उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है. 2022 में जहां भारत से सौर आयात 8.38 करोड़ डॉलर था, वहीं 2024 तक यह बढ़कर 79.26 करोड़ डॉलर के स्तर पर पहुंच गया. अमेरिका का मानना है कि इस ग्रोथ के पीछे भारतीय सरकार की दी जाने वाली सब्सिडी का बड़ा हाथ है.
US-India Solar Trade Dispute
भारत का आत्मनिर्भरता प्लान
एक तरफ जहां अमेरिका ने घेराबंदी शुरू की है, वहीं भारत अपनी आत्मनिर्भर नीति पर अडिग है. अभी के समय में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक है. घरेलू उद्योग को मजबूती देने के लिए सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं, जिसमें पीएलआई योजना के साथ मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स को अनिवार्य करना और इंपोर्ट में कमी लाना शामिल है.
countervailing duty on indian solar products
भारत ने उठाए यह कड़े कदम
पीएलआई योजना के जरिए सरकार ने करीब 48.3 गीगावाट कैपेसिटी की यूनिट्स बनाने के कॉन्ट्रैक्ट दिए हैं. इसके अलावा पीएम-कुसुम और रूफटॉप सोलर जैसी योजनाओं में मेड इन इंडिया पैनल और सेल का इस्तेमाल करना जरूरी कर दिया है. वहीं, भारत ने चीन पर निर्भरता कम करने में बड़ी सफलता हासिल की है. साल 2023-24 में जहां चीन से सौर आयात 2.85 अरब डॉलर था, वो 2024-25 में घटकर 1.7 अरब डॉलर रह गया.














