US Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनाव कम करने की बातचीत अब अपने आखिरी दौर में पहुंच चुकी है. अल अरबिया की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात की पुष्टि की. दोनों देशों के बीच एक समझौता तैयार किया जा रहा है. इसी सिलसिले में पाकिस्तान के सेना प्रमुख गुरुवार को ईरान का दौरा कर सकते हैं, जहां वे इस समझौते के फाइनल ड्राफ्ट के तैयार होने का ऐलान कर सकते हैं. इसके बाद,दोनों देशों के बीच अगले दौर की बैठक पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होगी. हालांकि, ये बैठक हज का महीना खत्म होने यानी 30 मई के बाद आयोजित की जाएगी. इसी के साथ शांति वार्ता की खबरों से कच्चे तेल की कीमतें नीचे आ गईं हैं.
'ईरान लड़ रहा ऐतिहासिक लड़ाई'
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने हाल ही में एक बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि उनका देश इस समय अमेरिका और इजरायल के खिलाफ मजबूत और ऐतिहासिक लड़ाई लड़ रहा है. मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरान इन दोनों के सामने डटकर खड़ा है. ये बात उन्होंने ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की दूसरी बरसी पर कही, जिनकी साल 2024 में एक हेलीकॉप्टर हादसे में जान चली गई थी.
ईरानी न्यूज एजेंसी फार्स के अनुसार, सर्वोच्च नेता ने ये भी कहा कि इस बदलते माहौल और चल रहे टेंशन की वजह से अब सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है. इसके साथ ही उन्होंने इस मुश्किल समय में पूरे देश की एकता की तारीफ करते हुए सभी का आभार जताया.
शांति वार्ता की उम्मीद में फिर सस्ता हुआ कच्चा तेल
युद्धविराम की बातों के बाद ग्लोबली बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के दामों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और ये लगभग 5 फीसदी तक टूट गया. वहीं अमेरिकी कच्चे तेल (US Crude) की कीमत भी फिसलकर 105.70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई. अगर अमेरिका और ईरान के बीच ये डील पक्की हो जाती है, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर से खुल सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ेगी और आने वाले दिनों में फ्यूल और सस्ता हो सकता है.
मालूम हो ये पूरा विवाद 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला कर दिया था. इसके बाद 8 अप्रैल से दोनों पक्षों के बीच एक अस्थायी युद्धविराम लागू है. इस बीच, ईरान के गार्ड्स ने भी पलटवार करते हुए कहा था कि अमेरिका और इजराइल जैसे दुश्मनों को ये समझ लेना चाहिए कि दुनिया की दो सबसे ताकतवर और महंगी सेनाओं के हमलों के बावजूद, ईरान ने अभी तक अपनी पूरी ताकत नहीं दिखाई है.
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