मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच राहत की एक बड़ी खबर आई है. दुनिया भर में गहराते युद्ध के संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सीजफायर (US-Iran Ceasefire) को आगे बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना फिलहाल अपने हमले रोकेगी ताकि तेहरान (Tehran) को युद्ध खत्म करने का प्रस्ताव रखने के लिए और समय मिल सके. लेकिन ईरान से जुड़े जहाजों पर अमेरिकी नौसेना का समुद्री ब्लॉकेड जारी रहेगा. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक बातचीत किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच जाती.
कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब
ट्रंप के बयान में कोई अंतिम तारीख तय नहीं की गई है, जिससे संकेत मिलता है कि फिलहाल अमेरिका की तरफ से यह सीजफायर (Iran-US Ceasefire) अनिश्चित समय तक जारी रह सकता है. इस खबर से ग्लोबल मार्केट ने राहत की सांस ली है, हालांकि तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. सीजफायर बढ़ने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं.
सीजफायर बढ़ने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली है. 22 अप्रैल की सुबह एशियाई बाजारों में कीमतें स्थिर बनी रहीं.ब्रेंट क्रूड (Brent Crude)करीब 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है और पिछले दो ट्रेडिंग सेशन में करीब 10% तक बढ़ चुका है.वहीं अमेरिकी क्रूड WTI (US Crude) करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है.
युद्ध की शुरुआत में 120 डॉलर तक पहुंच गया था तेल
पश्चिम एशिया युद्ध की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतें डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं.हालांकि बाद में कई बार सीज़फायर की घोषणा और उसके आगे बढ़ने के कारण कीमतों में गिरावट आई, लेकिन सप्लाई से जुड़ी चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि जब तक सप्लाई को लेकर चिंताएं बनी रहेंगी, कीमतें ऊंचे स्तर पर ही रहेंगी.
सीजफायर बढ़ा, लेकिन 'ब्लॉकेड' रहेगा जारी
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर साफ किया कि भले ही अमेरिका नए हमले नहीं करेगा, लेकिन ईरान के बंदरगाहों और तटों की घेराबंदी (Blockade) जारी रहेगी. अमेरिकी नौसेना ईरान से जुड़े जहाजों को तब तक रोके रखेगी जब तक कि बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच जाती. वहीं,रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को प्रभावी रूप से बंद कर रखा है, जिससे दुनिया की 20% एनर्जी सप्लाई प्रभावित हो रही है.इस वजह से दुनिया भर में ऊर्जा संकट का असर बना हुआ है और बाजार लगातार सतर्क हैं.
ग्लोबल मार्केट में रौनक, डॉलर में हलचल
सीजफायर बढ़ने की खबर का असर शेयर बाजारों पर पॉजिटिव दिखा है. अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स में हल्की तेजी देखने को मिली.ट्रंप के ऐलान के बाद S&P 500 फ्यूचर्स में 0.5% और नैस्डैक (Nasdaq) फ्यूचर्स में 0.6% की बढ़त दर्ज की गई.हालांकि डॉलर में उतार-चढ़ाव देखा गया.
एशियन मार्केट में जापान का निक्केई (Nikkei) 0.2% नीचे रहा क्योंकि ट्रेडर्स हाल की तेजी के बाद प्रॉफिट बुकिंग करते नजर आए, जबकि एशिया-पैसिफिक इंडेक्स में मामूली गिरावट रही. एशिया-पैसिफिक शेयर बाजारों में इस खबर का मिला-जुला असर देखने को मिला.
मिडिल ईस्ट युद्ध के झटके के बाद फिर संभला ग्लोबल मार्केट
मार्च में मिडिल ईस्ट युद्ध की वजह से ग्लोबल मार्केट में तेज गिरावट आई थी. लेकिन इस महीने अप्रैल में शांति समझौते की और सीज़फायर की वजह से बाजार दोबारा प्री-वॉर लेवल के करीब लौट आए हैं.
बातचीत में अड़चन और सप्लाई का संकट
मिडिल ईस्ट तनाव तब और बढ़ गया था जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत में शामिल होने के लिए अपना प्रस्तावित पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया था.उन्होंने ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत में हिस्सा लेने के लिए यह फैसला लिया. जिसके बाद मंगलवार को तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर के करीब पहुंच गईं. फिलहाल बाजार ट्रंप के इस एकतरफा फैसले पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि अभी यह साफ नहीं है कि ईरान या अमेरिका का सहयोगी देश इजरायल इस संघर्ष विराम विस्तार पर क्या रुख अपनाते हैं.














