- एक दिन पहले जहां चांदी 4 लाख के स्तर को पार करने वाली चांदी के दाम 24 घंटे में ही 80 हजार तक घट गए
- एक साल में चांदी की कीमत 4 गुना से अधिक हो गई थी जबकि इस दौरान सोने की कीमत दोगुनी हुई
- अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है. वायदा भाव भी गिरे हैं
कई दिनों से रिकॉर्ड बना रही चांदी में शुक्रवार को बड़ी गिरावट आई. एक दिन पहले जहां चांदी 4 लाख के स्तर को पार करके 4,20,048 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी, शुक्रवार शाम 5 बजे उसके दाम घटकर 3,39,350 रुपए प्रति किलो रह गए. यानी महज 24 घंटे के अंदर ही चांदी 80 हजार रुपये टूट गई. आइए बताते हैं चांदी के चमकने से लेकर मुरझाने तक की पूरी कहानी.
सोने से भी ज्यादा चांदी की चमक
31 जनवरी, 2025 | 30 जनवरी, 2026 | 1 साल में कीमत में बदलाव (रुपये में) | 1 साल में कीमत में बदलाव (% में) | |
चाँदी | Rs. 1,01,700 | Rs. 3,39,350 | Rs. 237,650 | 233 % |
सोना | Rs. 83,203 | Rs. 1,69,350 | Rs. 86,147 | 103% |
1 साल में कीमत में बदलाव
- चांदी - पिछले एक साल में चांदी की कीमत 4 गुना से अधिक हो गई थी
- सोना - पिछले एक साल में सोने की कीमत दोगुनी हो गई है
- इस तुलना के अनुसार, चांदी की कीमतें सोने की तुलना में दोगुनी तेजी से बढ़ीं
देखें- ट्रंप का बस एक ऐलान और चांदी-सोना हुए धड़ाम, जानें कैसे निकली बुलियन बाजार की हवा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम धड़ाम
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट है. खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना 3.84 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 5,150 डॉलर प्रति औंस और चांदी 10.56 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 102.34 डॉलर प्रति औंस थी. इसका असर गोल्ड एवं सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) पर भी देखने को मिला.
वायदा भाव की चमक भी फीकी
- वायदा कारोबार में भी चांदी के दाम बुरी तरह गिरे हैं. वैश्विक बाजारों में कमजोर रुझानों और अमेरिकी डॉलर में तेजी के कारण चांदी का वायदा भाव 17 फीसदी घटकर 3.32 लाख रुपये प्रति किलो रह गया.
- मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में मार्च में डिलीवरी वाले चांदी वायदा का भाव 67,891 रुपये (16.97% ) घटकर 3,32,002 रुपये प्रति किलो रह गया, जो एक दिन में इसकी सबसे बड़ी गिरावट है.
- गुरुवार को चांदी की कीमत करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 4,20,048 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, जिसके बाद यह 3,99,893 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई.
चांदी इतनी महंगी क्यों हो रही हैं?
- चांदी का इस्तेमाल सर्किट बोर्ड, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सौर पैनल और मेडिकल उपकरणों में होता है. डिमांड ज्यादा है और सप्लाई कम.
- अमेरिका और अन्य देशों के बीच टैरिफ टेंशन, रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान से तनाव आदि के बीच सरकारें सोने के साथ चांदी को स्टोर कर रही हैं.
- डॉलर और शेयर मार्केट में जहां उतार-चढ़ाव का खतरा ज्यादा होता है, चांदी हार्ड एसेट होने के कारण ज्यादा स्टेबल साबित हो रही है
- सोने की तरह, चांदी आभूषण और सिक्के बनाने के लिए लोकप्रिय धातु है. सोने से सस्ता होने के कारण कई छोटे निवेशक इसे पसंद करते हैं.
चांदी की कीमतें क्यों गिरीं?
- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने केविन वॉश को फेडरल रिजर्व का अगला प्रमुख बनाने का ऐलान किया है.
- फेड की ब्याज दरें घटने की उम्मीद में निवेशकों ने चांदी-सोने से पैसा निकालना शुरू कर दिया.
- चांदी 4 लाख के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गई थी, निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी.
- अमेरिका में संभावित शटडाउन टालने के लिए ट्रंप और डेमोक्रेट्स में समझौते के बाद डॉलर इंडेक्स में उछाल आया.
आगे क्या हो सकता है?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि शॉर्ट टर्म में भले ही उतार-चढ़ाव बना रहे, लेकिन सप्लाई की कमी और बढ़ती डिमांड से चांदी फिर से 4 लाख के पार जा सकती है. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी चमक को लेकर सतर्क रहना चाहिए और भविष्य में कीमतों में सुधार हो सकता है.













