जंग रुकी, अब इन 4 सेक्टर्स में बरसेगा पैसा! 5 एक्सपर्ट्स ने बताया- कौन-से शेयर करा सकते हैं तगड़ी कमाई

Share Market Expert Top Picks: मार्केट में लंबे समय से अनिश्चितता थी, लेकिन अब शांति की आहट ने निवेश के नए द्वार खोल दिए हैं. अब सवाल यह है कि निवेशक अपना पैसा कहां लगाएं? एक्‍सपर्ट्स ने कुछ सेक्‍टर्स और शेयर सुझाए हैं.

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Share Market Strategy: युद्ध थमने के बाद अब किन सेक्‍टर्स में आएगी बहार? कहां लगाएं पैसेघ्‍

Share Market Expert Top Picks: नियाभर के बाजारों के लिए एक महीने से ज्‍यादा लंबा समय काफी उथल-पुथल भरा रहा. मिडिल ईस्‍ट में ईरान के साथ पिछले 40 दिन से चल रही अमेरिका-इजरायल की जंग थम गई है. संघर्ष थमने और होर्मूज स्‍ट्रेट खुलने की खबरों ने मार्केट में नई जान फूंक दी है. कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट, RBI का ब्‍याज दरें नहीं बढ़ाने का फैसला, रुपये में उछाल...  भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी 'बूस्टर डोज' से कम नहीं है. जिन्‍होंने मार्केट में लगातार गिरावट के दौर में पैसे लगाए, उनमें से कइयों को फायदा मिलना तय है. लेकिन अब, जब जंग थम गई है तो निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब पैसे कहां लगाएं? वे कौन-से सेक्‍टर्स हैं, जो आने वाले समय में बेहतर रिटर्न दे सकते हैं. 

NDTV ने आपके मन में उठ रहे इन्‍हीं सवालों को लेकर मार्केट के 5 एक्‍सपर्ट्स से बात की, ताकि आप समझ सकें कि इस 'शांति-काल' में निवेश की सही रणनीति क्या होनी चाहिए.

कच्‍चे तेल की गिरावट से चमकेंगे ये 4 सेक्टर्स: निधि शर्मा

शेयर बाजार विश्लेषक (Share Market Analyst) निधि शर्मा ने बताया, 'कच्चे तेल की कीमतों में कमी का सबसे सीधा और बड़ा लाभ उन इंडस्‍ट्रीज को मिलता है जिनका कच्चा माल या परिचालन लागत तेल पर निर्भर है.' उनके विश्लेषण के अनुसार इन सेक्टर्स पर नजर रखनी चाहिए. 

  • एविएशन सेक्टर: विमानन कंपनियों के कुल खर्च का लगभग 35-40 प्रतिशत हिस्सा ईंधन (ATF) पर खर्च होता है. युद्ध के दौरान जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो इनका मुनाफा सिमट जाता है. अब शांति लौटने पर तेल की कीमतें गिरी हैं, जिससे इंडिगो (InterGlobe Aviation) और स्पाइसजेट जैसी कंपनियों के मार्जिन में जबरदस्त सुधार होगा. ये स्टॉक्स तेजी से रिकवरी दिखा सकते हैं.
  • ऑटो सेक्टर : कच्चे तेल के सस्ता होने से लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन की लागत कम हो जाती है. इसके अलावा, गिरती महंगाई के कारण आम आदमी की क्रय शक्ति (Purchasing Power) बढ़ती है. मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे शेयरों में मांग बढ़ने की पूरी संभावना है क्योंकि लोग अब कार खरीदने के अपने फैसले को आगे बढ़ाएंगे.
  • पेंट्स और केमिकल्स: पेंट और केमिकल उद्योग कच्चे तेल से प्राप्त होने वाले पेट्रोकेमिकल्स पर निर्भर करते हैं. कच्चे माल की लागत कम होने से एशियन पेंट्स और दीपक नाइट्राइट जैसी कंपनियों की लाभप्रदता (Profitability) में तेजी से सुधार होगा.
  • FMCG और कंजम्पशन: युद्ध के समय लोग केवल जरूरी चीजों पर खर्च करते हैं, लेकिन शांति काल में मांग फिर से लौटती है. हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी और नेस्ले इंडिया जैसे स्टॉक्स मंदी में भी सुरक्षित रहते हैं और बाजार सुधरने पर स्थिर रिटर्न देते हैं.

ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी में बड़ा मौका: अनूप गर्ग  

'वर्ल्ड ऑफ सर्कुलर इकोनॉमी' (WOCE) के फाउंडर अनूप गर्ग का मानना है कि भू-राजनीतिक संघर्षों ने दुनिया को यह सिखा दिया है कि तेल पर निर्भरता कितनी खतरनाक हो सकती है. उनके अनुसार, अब देशों और कंपनियों का ध्यान 'ग्रीन एनर्जी' की ओर तेजी से बढ़ेगा.

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गर्ग कहते हैं, 'शांति की बहाली के साथ ही अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy), ग्रीन हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी में निवेश का प्रवाह बढ़ेगा. रेगुलेटर और निवेशक दोनों ही अब कंपनियों पर पर्यावरण के अनुकूल होने का दबाव बना रहे हैं. यह दौर पारंपरिक ऊर्जा से स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण (Transition) का स्वर्ण युग साबित होगा.'

रियल एस्टेट में लौटेगा भरोसा: अमन गुप्ता 

आरपीएस ग्रुप के डायरेक्टर अमन गुप्ता के मुताबिक, जब वैश्विक तनाव कम होता है, तो आर्थिक सेंटिमेंट में सुधार आता है और इसका सीधा संबंध रियल एस्टेट की मांग से है. अनिश्चितता खत्म होने पर लोग घर खरीदने जैसे बड़े फैसले लेने में आत्मविश्वास महसूस करते हैं.

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गुप्ता का विश्लेषण है कि, 'एनसीआर (NCR) जैसे मेट्रो शहरों में घरों की बिक्री में सुधार देखा जाएगा, विशेष रूप से मिड-सेगमेंट और लक्जरी कैटेगरी में. बढ़ती लिक्विडिटी और स्थिर ब्याज दरें रियल एस्टेट के माहौल को बेहतर बनाएंगी. डेवलपर्स के लिए नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने और बदलती मांग के अनुसार खुद को ढालने का यह सबसे उपयुक्त समय है.'

लाइफस्टाइल और वेलनेस की ओर मुड़ेंगे ग्राहक: रिधिमा कंसल

रोजमूर (Rosemoore) की डायरेक्टर रिधिमा कंसल के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के खत्म होने से 'डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर' (D2C) ब्रांड्स के लिए व्यापारिक परिदृश्य स्थिर हुआ है. इसका सबसे ज्यादा फायदा स्टॉक मैनेजमेंट और मार्केटिंग खर्चों के नियोजन में मिलेगा.

वे कहती हैं, 'ब्यूटी, वेलनेस और लाइफस्टाइल कैटेगरी में जबरदस्त उछाल आने की उम्मीद है क्योंकि ग्राहक अब फिर से अपनी पसंद और आकांक्षाओं से जुड़ी खरीदारी की ओर लौट रहे हैं. हालांकि, बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण ब्रांडिंग और कंज्यूमर एंगेजमेंट पर ध्यान देना जरूरी होगा. उद्यमियों को अब अपने सप्लाई चेन नेटवर्क को मजबूत करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी बाधा से बचा जा सके.'

रिटेल और कंजम्पशन सेक्टर में 'इमोशनल अपलिफ्ट':  रघुनंदन सराफ 

सराफ फर्नीचर के संस्थापक और सीईओ रघुनंदन सराफ का मानना है कि शांतिकाल रिटेल जैसे कंजम्पशन-ड्रिवन उद्योगों के लिए भावनात्मक प्रोत्साहन का काम करता है. जब महंगाई का खतरा कम होता है, तो लोग अपनी मर्जी से किए जाने वाले खर्च (Discretionary Expenditure) को फिर से शुरू करते हैं.

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सराफ के अनुसार, 'आने वाले फेस्टिव सीजन में ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ेगी. हालांकि, इसका फायदा उन्हीं कंपनियों को मिलेगा जिन्होंने कठिन समय में अपने दाम और ग्राहकों के साथ रिश्ते स्थिर रखे थे. अब ग्रोथ का लक्ष्य टियर-II और टियर-III शहरों तक विस्तार करना और 'एक्सपीरिएंशियल रिटेलिंग' को अपनाना होना चाहिए.'

ध्‍यान रखें: ग्‍लोबल अनिश्चितता बनी हुई है 

पूरी दुनिया अब एक नए आर्थिक युग की ओर देख रही है. विशेषज्ञों की राय से यह स्पष्ट है कि पैसा केवल एक ही जगह नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से लगाया जाना चाहिए. जहां एविएशन और ऑटो सेक्टर 'शॉर्ट-टर्म' में तेजी दिखा सकते हैं, वहीं ग्रीन एनर्जी और रियल एस्टेट 'लॉन्ग-टर्म' के लिए बेहतरीन विकल्प हैं. शांति के इस काल में वही निवेशक सफल होगा जो केवल तेजी के पीछे नहीं भागेगा, बल्कि उन कंपनियों को चुनेगा जिनके पास ठोस बिजनेस मॉडल और वास्तविक मुनाफा कमाने की क्षमता है. हालांकि जानकारों का ये भी कहना ह कि वैश्विक अनिश्चितता बनी हुई है, इसलिए फूंक-फूंक कर कदम रखना जरूरी है. 

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Disclaimer: बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है. ये रिपोर्ट केवल जानकारी बढ़ाने के लिए है. एक्‍सपर्ट की राय से NDTV का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है. किसी भी सेक्टर में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से चर्चा जरूर करें और उनकी सलाह लेना ही श्रेयस्‍कर है.  
 

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