Share Market Update:भारतीय शेयर बाजार ने आज जबरदस्त ओपनिंग दी है.भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुई ऐतिहासिक FTA का असर बाजार पर साफ दिख रहा है. बुधवार (28 जनवरी) को बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी ने लंबी छलांग लगाई है.
सुबह 9:23 बजे सेंसेक्स में 614.98 अंकों (0.75%) की शानदार बढ़त के साथ 82,472.45 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था. वहीं, निफ्टी 50 भी 25,360.15 के स्तर पर पहुंच गया है, जो कल के मुकाबले 184.75 अंकों (0.73%) की मजबूती दिखाता है.
क्यों आई बाजार में इतनी तेजी?
बाजार की इस 'रॉकेट' जैसी रफ्तार के पीछे सबसे बड़ी वजह भारत-EU ट्रेड डील है. इस समझौते के तहत भारत के 90% निर्यात (Exports) पर अब कोई टैरिफ नहीं लगेगा. इससे भारतीय कंपनियों, खासकर टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल और आईटी सेक्टर को सीधा फायदा होने की उम्मीद है. कल (मंगलवार) भी इस डील की खबर के बाद सेंसेक्स 319 अंक और निफ्टी 126 अंक चढ़कर बंद हुए थे.
बैंक, रियल्टी और ऑयल एंड गैस शेयरों में तेजी
निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई, तो वहीं निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.6 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई.सेक्टरवार देखें तो निफ्टी प्राइवेट बैंक, रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयरों में शामिल थे, जिनमें से प्रत्येक में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई.वहीं, ऑटो और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में गिरावट देखी गई.
सेंसेक्स पैक में, एक्सिस बैंक, ट्रेंट, आईटीसी, पावरग्रिड, आईसीआईसीआई बैंक, एनटीपीसी, बीईएल, टीसीएस और अदाणी पोर्ट्स टॉप गेनर्स में शामिल रहे, जबकि एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा और एसबीआई टॉप लूजर्स की लिस्ट में शामिल रहे.
बाजार में तेजी की 3 बड़ी वजहें:
भारत-EU ट्रेड डील का जलवा: मंगलवार को भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुई ऐतिहासिक डील के बाद बाजार का सेंटिमेंट बदल गया है. इस डील के तहत भारत के 90% सामानों पर टैरिफ खत्म कर दिया गया है, जिससे एक्सपोर्टर्स को बड़ा फायदा होगा.
ग्लोबल मार्केट में मजबूती: अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच ट्रेड टेंशन कम होने और डॉलर के 4 साल के निचले स्तर पर आने से वैश्विक बाजारों में रौनक है. एशिया-पैसिफिक इंडेक्स भी आज 0.9% ऊपर है.
HSBC की पॉजिटिव रिपोर्ट: दिग्गज ब्रोकरेज फर्म HSBC का मानना है कि भारत-EU डील से न सिर्फ व्यापार बढ़ेगा बल्कि भारत में भारी विदेशी निवेश (FDI) भी आएगा.














