ईरान ही नहीं, तेल-गैस संकट के बीच भारत का ये 'दोस्‍त' भी काट रहा चांदी, हर महीने 24 मिलियन डॉलर की कमाई! 

Amid Crude Oil Price Hike: कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 38 प्रतिशत बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब चल रही है. इसकी वजह यह है कि मिडिल ईस्ट का तेल दुनिया के बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहा है. ऐसे में रूसी तेल की मांग अचानक बढ़ गई है.

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Russian Crude Oil Demand: ईरान वॉर के बीच रूस तेल बेचकर कर रहा मोटी कमाई

Crude Oil Russia India Iran: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में छिड़ी भीषण जंग ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को संकट में डाल दिया है. लेकिन इस तनाव के बीच ईरान के अलावा एक देश ऐसा है जिसे सबसे ज्यादा फायदा हो रहा है और वह है- रूस. ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी इस संघर्ष (Iran-Israel US Conflict) ने वैश्विक तेल बाजार में रूस की स्थिति को फिर से बेहद मजबूत कर दिया है. कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 38 प्रतिशत बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब चल रही है. इसकी वजह यह है कि मिडिल ईस्ट का तेल दुनिया के बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहा है. ऐसे में रूसी तेल की मांग अचानक बढ़ गई है.

रूस को मिल रहा है 'विंडफॉल' मुनाफा

एक रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल से रूस को हर महीने अरबों डॉलर का अतिरिक्त फायदा हो रहा है. कीव स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के अनुमान के अनुसार, रूस की तेल और गैस से होने वाली मासिक कमाई जो पहले 12 बिलियन डॉलर थी, वह अब बढ़कर 24 बिलियन डॉलर के करीब पहुंच सकती है.

पुतिन की कंपनियों को चेतावनी 

कमाई में इस जबरदस्त उछाल के बावजूद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन काफी सतर्क नजर आ रहे हैं. उन्होंने अपनी तेल और गैस कंपनियों को सार्वजनिक रूप से नसीहत दी है कि वे इस अतिरिक्त पैसे को फिजूलखर्च करने के बजाय अपना कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करें.

पुतिन ने एक आर्थिक बैठक में कहा, 'बाजार आज एक तरफ झुक रहा है, तो कल दूसरी तरफ भी जा सकता है. हमें समझदारी दिखानी होगी.' उन्होंने कंपनियों से कहा कि वे घरेलू बैंकों का कर्ज चुकाकर अपनी स्थिति मजबूत करें. उन्होंने इस वैश्विक संकट की तुलना कोरोना महामारी के समय आए आर्थिक झटके से की.

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भारत के लिए रूसी तेल बना 'संकटमोचन'

इस युद्ध का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ा है. भारत अपनी जरूरत का करीब आधा कच्चा तेल 'हॉर्मुज' के रास्ते ही मंगाता है, जो अभी बाधित है. ऐसे में भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से तेल की खरीदारी काफी तेज कर दी है.

आंकड़ों के मुताबिक, मार्च के महीने में भारत रूस से रोजाना 18 से 20 लाख बैरल कच्चा तेल आयात कर सकता है. यह आंकड़ा उतना ही है जितना यूक्रेन युद्ध के शुरुआती दौर में देखा गया था. अमेरिका ने भी कीमतों को और ज्यादा बढ़ने से रोकने के लिए रूसी तेल की खरीद पर 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है, जिससे भारत को राहत मिली है.

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रूस और ईरान की बढ़ती नजदीकियां!

तेल के अलावा, पश्चिमी देशों की इंटेलिजेंस रिपोर्ट यह भी दावा कर रही हैं कि रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग बढ़ रहा है. 'FT' के अनुसार, रूस जल्द ही ईरान को ड्रोन, दवाइयां और खाद्य सामग्री की खेप भेजने वाला है. हालांकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इन खबरों को 'फेक' बताते हुए कहा है कि ईरान के साथ उनका संवाद जारी है लेकिन हथियारों की सप्लाई की खबरें सच नहीं हैं. कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट का तनाव जहां पूरी दुनिया के लिए महंगाई की टेंशन लेकर आया है, वहीं रूस के लिए यह अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक बड़ा मौका साबित हो रहा है.

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