RBI MPC Meeting April 2026: अगर आप इस उम्मीद में हैं कि इस बार रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों में कटौती करेगा और आपके घर या कार की EMI कम हो जाएगी, तो आपको थोड़ा संभलकर रहने की जरूरत है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में तीन दिनों की बेहद अहम बैठक हो रही है.मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की ये बैठक बीते दिन यानी सोमवार, 6 अप्रैल से शुरू हुई है. कल यानी बुधवार, 8 अप्रैल को इस बैठक का फैसला सुनाया जाएगा. लेकिन सवाल वही है क्या आपकी जेब को राहत मिलेगी? मौजूदा हालात को देखते हुए एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम ही है. आइए समझते हैं कि आखिर पेंच कहां फंसा है.
EMI कम होगी या वैसी ही रहेगी?
ज्यादातर इकोनॉमिसेट और जानकारों का कहना है कि रिजर्व बैंक इस बार रेपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं करेगा. फिलहाल रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रहने की पूरी संभावना है. इसका मतलब है कि आपकी होम लोन या कार लोन की EMI अभी कम नहीं होने वाली. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिस तरह से वैश्विक हालात बदल रहे हैं, आरबीआई अभी "वेट एंड वॉच" की पॉलिसी अपना सकता है.
ईरान-अमेरिका जंग ने बिगाड़ा सारा खेल
इस बैठक पर सबसे बड़ा साया पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका संकट का है. युद्ध की वजह से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं. जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल में 10 डॉलर की हर बढ़ोतरी भारत में महंगाई को 0.60% तक बढ़ा देती है. ऐसे में आरबीआई का पूरा ध्यान इस समय महंगाई को काबू में रखने पर है, न कि ब्याज दरें घटाने पर.
रुपये की गिरावट और महंगाई का डबल अटैक
युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय रुपया भी काफी कमजोर हुआ है और डॉलर के मुकाबले 94.83 के रिकॉर्ड निचले स्तर को छू गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक कच्चा तेल महंगा रहेगा और रुपया कमजोर रहेगा, तब तक आरबीआई ब्याज दरों में कटौती का जोखिम नहीं उठाएगा.
क्या कहते हैं दिग्गज एक्सपर्ट्स?
बैंक ऑफ बड़ौदा के एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध का असली असर अगले 3-4 महीनों में साफ होगा, तभी ब्याज दरों की अगली दिशा तय होगी.बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार, आरबीआई अभी तटस्थ (Neutral) रुख अपनाएगा. अगर महंगाई 6% के ऊपर जाती है, तो साल के अंत तक दरों में बढ़ोतरी भी देखनी पड़ सकती है.
HSBC के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह बैठक मुख्य रूप से तेल की कीमतों से पैदा हुई चिंता को दूर करने के लिए होगी. रेट कट का साइकिल फिलहाल खत्म हो चुका है और अब एक लंबा ब्रेक देखने को मिल सकता है.
इन बातों पर रहेगी सबकी नजर
8 अप्रैल को जब आरबीआई गवर्नर MPC की मीटिंग में लिए गए फैसले को लेकर अपनी बात रखेंगे, तो सबकी नजर सिर्फ ब्याज दरों को ही नहीं, बल्कि GDP ग्रोथ और महंगाई के नए अनुमानों को भी बारीकी से देखेंगे. आरबीआई को खुदरा महंगाई को 4% (2% ऊपर या नीचे) के दायरे में रखने का लक्ष्य मिला हुआ है, जो फिलहाल कच्चे तेल की वजह से खतरे में दिख रहा है.














