PhonePe Saga: UPI क्रांति से 10 साल में 65 करोड़ यूजर्स, अब IPO की तैयारी! फोनपे की कामयाबी का ये है फॉर्मूला

The PhonePe Saga: अपने दसवें साल में फोनपे का फोकस सिर्फ विस्तार नहीं, ये अब सार्वजनिक कंपनी बनने की तैयारी में है और लक्ष्य है- हर भारतीय की वित्तीय यात्रा का भरोसेमंद डिजिटल इंजन बनना.

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PhonePe Success Story: फोनपे ऐप को सफलता यूं ही नहीं मिल गई, इसके पीछे 10 साल की यात्रा है, पूरी कहानी जान लीजिए
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  • फोनपे ने UPI के शुरुआती दौर में छोटे मोबाइल रिचार्ज और बिल भुगतान से अपनी यात्रा शुरू की थी,
  • आज फोनपे के 65 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड यूजर्स हैं, जिनमें से अधिकांश टियर-2, टियर-3 और ग्रामीण क्षेत्र के हैं
  • कंपनी ने UAE, सिंगापुर और श्रीलंका में इंटरनेशनल UPI पेमेंट शुरू कर वैश्विक विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं
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आप UPI तो इस्‍तेमाल करते होंगे न? आप सोचेंगे, भई ये कैसा सवाल हुआ! जरूर करते होंगे! कई वर्षों से करते होंगे! आपके मोबाइल फोन में एक या ज्‍यादा UPI ऐप भी इंस्‍टॉल होगा! और अगर ये PhonePe हुआ तो आप भी इस ऐप के 65 करोड़ यूजर्स वाली फैमिली के एक मेंबर हैं. आप 10 साल पहले के समय की कल्‍पना कीजिए. वो दौर था, जब मोबाइल रिचार्ज के लिए आपको दुकानों की दौड़ लगानी होती थी या बिजली का बिल भरने के लिए लोगों को लंबी कतारों में लगना पड़ता था. फिर डिजिटल पेमेंट का दौर आया और इसी बदलाव के साथ एक नाम तेजी से उभरा- फोनपे (PhonePe). 

यूपीआई के शुरुआती दौर में अपनी यात्रा शुरू करने वाली ये कंपनी अब केवल एक पेमेंट ऐप नहीं रही, बल्कि एक बड़े फिनटेक इकोसिस्टम में बदल चुकी है, जो करोड़ों भारतीयों की रोजमर्रा की जरूरतों का हिस्सा बन गया है. कंपनी जल्‍द ही अपना IPO लाने वाली है. यानी अब तक आप जिस ऐप के केवल यूजर रहे हैं, आप उस कंपनी के शेयरहोल्‍डर्स में शामिल हो सकते हैं. कंपनी, प्राइवेट से पब्लिक होने वाली है, लेकिन ये सब यूं ही अचानक नहीं हो गया. इसके पीछे कंपनी की एक दशक की यात्रा (10 Years Journey) है. 

छोटे ट्रांजैक्शन से शुरू हुई बड़ी कहानी

फोनपे की यात्रा किसी बड़े 'यूरेका मोमेंट'से नहीं, बल्कि आम लोगों की छोटी जरूरतों से शुरू हुई. जब कई ग्लोबल फिनटेक कंपनियां बड़े ट्रांजैक्शन पर ध्यान दे रही थीं, तब फोनपे ने मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल और छोटे भुगतान जैसे 'यूज़ केस ड्रिवन' मॉडल पर काम किया. यही रणनीति कंपनी के लिए गेम चेंजर साबित हुई. लोगों ने रोजमर्रा के कामों के लिए ऐप का इस्तेमाल शुरू किया और धीरे-धीरे यह उनकी डिजिटल आदत बन गई.

65 करोड़ यूजर्स और गांव-गांव तक पहुंच

आज फोनपे के पास 65 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं और करीब 4.7 करोड़ व्यापारियों का नेटवर्क देशभर में फैला हुआ है. खास बात यह है कि इसके 65 प्रतिशत से ज्यादा यूजर्स टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों से आते हैं. 'बिल्डिंग फॉर भारत' रणनीति के तहत कंपनी ने डिजिटल भुगतान को सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि छोटे कस्बों और गांवों तक पहुंचाया.

पेमेंट ऐप से आगे, फाइनेंशियल सुपर प्लेटफॉर्म

समय के साथ फोनपे ने अपने प्लेटफॉर्म पर कई सेवाएं जोड़ दीं. अब यूजर्स सिर्फ यूपीआई पेमेंट ही नहीं, बल्कि लोन रीपेमेंट, फास्टैग रिचार्ज, बिल भुगतान और निवेश जैसी सेवाएं भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
वेल्थ मैनेजमेंट के क्षेत्र में डिजिटल गोल्ड, गोल्ड SIP और म्यूचुअल फंड निवेश जैसे विकल्प उपलब्ध हैं. वहीं बीमा सेक्टर में मोटर, हेल्थ और ट्रैवल इंश्योरेंस भी ऐप पर मिल रहा है.

छोटे व्यापारियों के लिए 'डिजिटल साथी' बना फोनपे

फोनपे बिजनेस ऐप ने छोटे दुकानदारों के लिए डिजिटल भुगतान को आसान बनाया है. कंपनी का 'स्मार्टपॉड' डिवाइस स्मार्ट स्पीकर और POS मशीन का मिश्रण है, जिससे छोटे व्यापारी भी आसानी से यूपीआई और कार्ड पेमेंट स्वीकार कर सकते हैं. पेपरलेस लेंडिंग और इंस्टेंट सेटलमेंट जैसी सुविधाओं ने छोटे कारोबारियों को वह टेक्नोलॉजी दी है, जो पहले बड़ी रिटेल कंपनियों तक सीमित थी.

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भारत से दुनिया के दूसरे देशों तक किया विस्तार

फोनपे अब इंटरनेशनल यूपीआई पेमेंट की दिशा में भी कदम बढ़ा चुका है. यूएई, सिंगापुर और श्रीलंका जैसे देशों में यूपीआई भुगतान की सुविधा देकर कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया है. 11 से ज्यादा भारतीय भाषाओं में सपोर्ट और आसान इंटरफेस ने डिजिटल पेमेंट को लाखों नए यूजर्स के लिए सहज बनाया है.

अब पब्लिक मार्केट की ओर नजर

अपने दसवें साल में फोनपे का फोकस सिर्फ विस्तार नहीं, बल्कि स्थायित्व और परिपक्वता पर है. कंपनी अब सार्वजनिक कंपनी बनने की तैयारी में है और लक्ष्य है-हर भारतीय की वित्तीय यात्रा का भरोसेमंद डिजिटल इंजन बनना. जानकारों का मानना है कि छोटे यूजर्स और छोटे व्यापारियों पर फोकस ही फोनपे की सबसे बड़ी ताकत रही है, जिसने इसे एक साधारण ऐप से फिनटेक साम्राज्य में बदल दिया.

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