Ai Vs Human: लंबे समय से ये बहस चली आ रही है कि AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस लोगों की नौकरी खा जाएगा या फिर कंपनियों में कम कर्मचारियों की जरूरत ही रह जाएगी. इस पर विरोधाभास भी है. लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि एक पूरी कंपनी बिना किसी इंसानी कर्मचारी के चल सकती है? सुनने में यह किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन फ्लोरिडा के एक एंटरप्रेन्योर ने इसे हकीकत में बदल दिया है. डिफेंस टेक फाउंडर आरोन स्नीड (Aaron Sneed) अपनी पूरी कंपनी को चलाने के लिए इंसानों पर नहीं, बल्कि 15 AI एजेंट्स पर भरोसा कर रहे हैं.
'The Council': जब AI कर्मचारी करते हैं मीटिंग
आरोन ने 15 AI एजेंट्स की एक टीम बनाई है, जिसे उन्होंने 'The Council' (परिषद) नाम दिया है. इस टीम में एक "Chief of Staff" एजेंट भी है, जिसका काम यह तय करना है कि कौन सा काम सबसे पहले होगा. ये एजेंट्स आपस में 'वर्चुअल राउंडटेबल' मीटिंग करते हैं, प्रपोजल्स पर चर्चा करते हैं और एक-दूसरे की गलतियां भी निकालते हैं.
HR से लेकर लीगल तक, सब AI के हाथ में
स्नीड ने अपनी कंपनी के अहम विभाग AI को सौंप दिए हैं.
- HR और लीगल: कागजी कार्रवाई और ड्राफ्टिंग.
- सप्लाई चेन और क्वालिटी कंट्रोल: ऑपरेशन्स की निगरानी.
- डेटा मैनेजमेंट: सूचनाओं का विश्लेषण.
हफ्ते के 20 घंटे और लाखों की लागत
Sneed के मुताबिक, एक सोलो फाउंडर के लिए ये एजेंट्स किसी वरदान से कम नहीं हैं. इनसे न सिर्फ खर्च कम हुआ है, बल्कि उनके हफ्ते के 20 घंटे का समय भी बच रहा है. हर एजेंट को तैयार करने में उन्हें लगभग दो हफ्ते का समय लगा.
क्या अब इंसानों की जरूरत खत्म?
हालांकि स्नीड का मानना है कि AI पूरी तरह इंसान की जगह नहीं ले सकता. उदाहरण के लिए, उनका 'लीगल एजेंट' कागजात तो तैयार कर देता है, लेकिन आखिरी फैसले के लिए अभी भी एक वकील की सलाह ली जाती है. स्नीड एक 'हाइब्रिड मॉडल' का सपना देख रहे हैं, जहां इंसान और AI कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे, मशीनें बोरियत भरे काम करेंगी और इंसान दिमाग लगाएंगे.














