शेयर बाजार में निवेश का सबसे सुनहरा मौका! रिधम देसाई ने बताया- युद्ध के बाद भारत के लिए क्या-क्या बदलेगा, AI और तेल की कीमतों पर कही ये बात

NDTV Profit Townhall: रिधम देसाई ने निवेशकों को सलाह दी कि इक्विटी में निवेश हमेशा 8-10 साल के टाइमफ्रेम को ध्यान में रखकर करना चाहिए.उन्होंने साफ कहा कि इक्विटी मार्केट 6 महीने के टाइमफ्रेम में काम नहीं करती और इसमें धैर्य जरूरी होता है.

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Ridham Desai Market Outlook: मॉर्गन स्टेनली के रिधम देसाई बोले , भारत अगले 10 साल में ग्लोबल ट्रेड और AI में बड़ी ताकत बनेगा
नई दिल्ली:

भारत की अर्थव्यवस्था, शेयर बाजार, AI और ग्लोबल ट्रेड को लेकर  मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) के रिधम देसाई ने NDTV Profit के टाउनहॉल में बेहद अहम बातें साझा की हैं. उन्होंने बताया कि मौजूदा युद्ध और अनिश्चितता के दौर में भी भारत के लिए क्यों बहुत कुछ अच्छा होने वाला है और निवेशकों को इस वक्त किस तरह की स्ट्रैटजी अपनानी चाहिए. उनका कहना है कि भारत आने वाले वर्षों में कई सेक्टर में मजबूत बढ़त ले सकता है. हालांकि उन्होंने निवेशकों को लॉन्ग टर्म का नजरिया रखने की सलाह भी दी. 

आइए जानते हैं उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था, इक्विटी मार्केट, AI और IT सेक्टर को लेकर क्या-क्या अहम बातें कहीं.

बाजार में पैसे लगाने का'परफेक्ट' समय, 8-10 साल के नजरिए से करें निवेश

रिधम देसाई का मानना है कि यह कोरोना (COVID) महामारी के बाद शेयर बाजार में खरीदारी करने का सबसे अच्छा समय है. उन्होंने साफ कहा कि शेयर बाजार 6 महीने के नजरिए से नहीं चलता, इसलिए निवेशकों को 8 से 10 साल का लंबा नजरिया रखना चाहिए. उनके मुताबिक, मार्केट के टॉप और बॉटम (Tops and Bottoms) पकड़ने  की कोशिश करना सही रणनीति नहीं होती.रिधम देसाई के मुताबिक पिछले 12 महीनों में भारत की हाई वैल्यूएशन काफी हद तक कम हो चुकी है. उन्होंने बताया कि साल 2020 की अनिश्चितता में भी उन्होंने खरीदारी शुरू की थी और आज फिर वैसे ही हालात और अवसर दिख रहे हैं.

भारत का बैलेंस शीट मजबूत,ग्लोबल ट्रेड में हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना

रिधम देसाई के मुताबिक भारत में सप्लाई चेन से जुड़े कई सेक्टर अगले 10 साल में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं. यह क्षेत्र भारत की मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल ट्रेड हिस्सेदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा.उन्होंने कहा कि भारत की बैलेंस शीट बहुत मजबूत है,जो अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है. देश की लेबर कॉस्ट चीन के मुकाबले काफी कम है. यही वजह है कि आने वाले समय में कई कंपनियां भारत की ओर शिफ्ट हो सकती हैं. 

भारत ग्लोबल ट्रेड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए तैयार है.उन्होंने बताया कि विदेशी निवेशक (FPIs) इसलिए बिकवाली कर रहे हैं क्योंकि बाजार में नए कॉर्पोरेट इश्युएंस की कमी है, न कि भारत के प्रति भरोसे की कमी है. 

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सर्विसेज सेक्टर में भारत ग्लोबल लीडर

रिधम देसाई का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में निवेशक काफी हद तक जागरूक हैं और इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है.उन्होंने बताया कि एक दशक पहले के मुकाबले भारत के टैक्स रेट अब काफी ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो चुके हैं, जिससे निवेश का माहौल बेहतर हुआ है. रिधम देसाई ने कहा कि ग्लोबल सर्विसेज शेयर में भारत पहले से ही अग्रणी स्थिति में है और यह बढ़त आगे भी जारी रह सकती है.

कच्चा तेल 130 डॉलर प्रति बैरल हुआ तो भारत को झटका!

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती है तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.  यह भारत के लिए असली दर्द का कारण बनेगा. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा ऑयल प्राइस से फिलहाल भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है.  उन्होंने बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था में बचत और खपत का अनुपात यानी सेविंग और कंजम्पशन रेशियो  (Savings-Consumption Ratio) काफी संतुलित संतुलित है और हम हर क्षेत्र में अपनी क्षमता (Capacity) बढ़ाने पर काम कर रहे हैं.

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AI कोई बबल नहीं, भारत को होगा बड़ा फायदा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करते हुए देसाई ने कहा कि AI कोई बबल (Bubble) नहीं है, बल्कि यह लंबे समय तक रहने वाली टेक्नोलॉजी है.  उन्होंने कहा कि भारत AI का सबसे ज्यादा फायदा उठाने वाले देशों में से एक होगा.हालांकि, शुरुआती दौर में AI ट्रेड की कमी से भारतीय बाजार को नुकसान हुआ है, लेकिन 2028 तक आईटी कंपनियों की कमाई में इसके फायदे साफ दिखने लगेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि AI मिड-मैनेजमेंट के लिए संकट पैदा कर सकता है, लेकिन  जहां प्रोडक्टिविटी कम है वहां AI बड़ा बदलाव ला सकता है. यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में भी AI के इस्तेमाल से केस कम हुए हैं. 

2028 तक IT कंपनियों की कमाई में दिखेगा AI का असर

भारतीय आईटी सर्विसेज (IT Services) कंपनियां अभी ट्रांजिशन फेज यानी बदलाव के दौर से गुजर रही हैं. रिधम देसाई को इस सेक्टर में बड़े अवसर दिख रहे हैं. उनके मुताबिक भारतीय IT सर्विसेज कंपनियों के सामने बड़े अवसर मौजूद हैं.भारत AI एप्लीकेशन बनाने में सबसे आगे है. उन्होंने कहा कि शॉर्ट-टर्म में AI एक रिस्क लग सकता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में यह भारत की ग्रोथ के लिए बहुत बड़ा प्लस पॉइंट साबित होगा.रिधम देसाई का मानना है कि 2028 तक IT सर्विसेज कंपनियों की कमाई में AI का फायदा दिखना शुरू हो जाएगा. 

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