- ईरान-इजरायल युद्ध के कारण भारत से मध्य एशिया और मध्य पूर्व देशों में निर्यात माल बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं
- शिपिंग कंपनियों ने कंटेनर शिपिंग चार्ज 400 डॉलर से बढ़ाकर 2500 डॉलर प्रति कंटेनर कर दिया है
- राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने वाणिज्य मंत्री से शिपिंग शुल्क और फंसे कंसाइनमेंट की समस्या पर हस्तक्षेप मांग की
ईरान, इजरायल और अमेरिका में बढ़ते युद्ध का असर अब सीधे भारत के विदेशी व्यापार पर दिखाई देने लगा है. भारत से मध्य एशिया और मध्य पूर्व के सात‑आठ देशों में भेजे जाने वाले अरबों डॉलर के निर्यात माल या तो रास्ते में फंस गए हैं या बंदरगाहों पर अटके हुए हैं. इससे न सिर्फ एक्सपोर्टर्स की चिंता बढ़ी है बल्कि कई सेक्टरों में सप्लाई चेन पर गहरा खतरा मंडराने लगा है.
शिपिंग कंपनियों ने चार्ज 500% तक बढ़ाया
ईरान-इजरायल युद्ध के चलते मध्य पूर्व क्षेत्र में कार्गो जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है. इसका सीधा असर भारत से निर्यात होने वाले कंसाइनमेंट पर पड़ा है. युद्ध से पहले हर कंटेनर की शिपिंग लागत 400 डॉलर थी. अब शिपिंग कंपनियों ने इसे बढ़ाकर 2500 डॉलर प्रति कंटेनर कर दिया है, यानी 500% से अधिक इजाफा. यह अचानक बढ़ा खर्च एक्सपोर्ट यूनिट्स पर भारी आर्थिक बोझ डाल रहा है.
ये भी पढ़ें : ईरान-इजरायल की जंग में एक भारतीय की मौत, ओमान की खाड़ी में तेल टैंकर पर हमले में गई जान
राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन की सरकार से क्या मांग
शिपिंग संकट गहराने पर ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है. एसोसिएशन ने मांग की है कि शिपिंग एजेंसियों और एक्सपोर्टर्स की संयुक्त बैठक बुलाई जाए, बढ़ते चार्ज और अटके कंसाइनमेंट की समस्या पर तुरंत समाधान निकाला जाए. NDTV से बातचीत में एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी अजय भालोटिया बोले कि भारत से मध्य एशिया भेजे जा रहे अरबों डॉलर के एक्सपोर्ट सामान अलग‑अलग देशों के पोर्ट और कार्गो शिप में फंसे हुए हैं.
शिपिंग एजेंसियों ने प्रति कंटेनर चार्ज 400 डॉलर से बढ़ाकर 2500 डॉलर कर दिया है. कई देशों के पोर्ट प्रशासन एक्सपोर्टर्स से अतिरिक्त चार्ज की मांग कर रहे हैं. इस संकट के समाधान के लिए सरकार और शिपिंग कंपनियों की तत्काल बैठक बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि हजारों भारतीय कंटेनर मध्य एशिया के रास्ते में फंसे हैं और उनकी वैल्यू कई बिलियन डॉलर में है.
बासमती चावल पर सबसे बड़ा असर
भारत से निर्यात होने वाले बासमती चावल का लगभग 25% हिस्सा ईरान भेजा जाता है. इसकी वार्षिक वैल्यू 1.25 बिलियन डॉलर है. युद्ध के चलते अब यह भी अनिश्चित है कि यदि भारतीय कंसाइनमेंट ईरान के पोर्ट तक पहुंच भी जाए, तो क्या वहां के खरीदार मौजूदा हालात में उसे स्वीकार करेंगे? यह स्थिति भारत के कृषि निर्यात के लिए बड़ी चिंता का विषय है.
ये भी पढ़ें ; ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरने के लिए तैयार अगर.. फ्रांस के विदेश मंत्री का बड़ा बयान
सकंट कितना गहराया
भारत से मध्य पूर्व भेजे जा रहे हजारों कंटेनर विभिन्न देशों के पोर्ट या ट्रांजिट में फंसे हैं. शिपिंग रूट असुरक्षित होने के कारण जहाज़ों की गति बेहद धीमी है. एक्सपोर्ट यूनिट्स में तैयार लाखों बोरी माल शिपमेंट का इंतजार कर रही हैं.














