मनरेगा vs वीबी जी राम जी:1 जुलाई से बदल जाएगी ग्रामीण भारत की तस्वीर, समझिए दोनों योजनाओं में 5 बड़े अंतर

केंद्र सरकार 1 जुलाई से मनरेगा की जगह नया एक्ट विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन, 2025 लागू करने जा रही है. जानिए मनरेगा और इस नए 'ग्राम जी' एक्ट में बजट शेयरिंग, रोजगार के दिन और जल सुरक्षा से जुड़े क्या बड़े बदलाव होने जा रहे हैं.

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1 जुलाई को केंद्र सरकार वीबी जी राम जी एक्ट को लागू करने जा रही है.

देश के गांवो में रोजगार की बड़ी योजना मनरेगा की जगह सरकार 1 जुलाई 2026 से 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन' यानी 'VB-GRAM G' एक्ट लागू करने जा रही है. इसके लिए बीते दिनों अहम बैठकें भी हुईं, जिसमें कई मंत्रालयों के अधिकारी मौजूद रहे. सरकार का कहना है कि इस नए कानून से गांवों में लोगों को पहले से कहीं ज्यादा दिनों तक काम मिलेगा और पानी की समस्या भी दूर करने में मदद मिलेगी. ऐसे में ग्रामीण आम लोगों और काम की तलाश कर रहे मजदूरों के लिए ये समझना जरूरी है कि नई योजना मनरेगा से कितनी अलग है. तो चलिए दोनों योजनाओं के 5 बड़े फर्क समझते हैं.

1. रोजगार के दिनों की संख्या में इजाफा

मनरेगा और नए ग्राम जी कानून में जो सबसे बड़ा बदलाव मजदूरों को दिखने वाला है, वो है काम के दिनों की संख्या. मनरेगा में अभी तक गांव में परिवारों के सदस्यों को साल में कम से कम 100 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम की गारंटी दी जाती थी. वहीं,  ग्राम जी एक्ट में अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है. यानी अब ग्रामीण परिवारों को साल में 25 दिन का ज्यादा रोजगार मिलेगा, जिससे उनकी सालाना इनकम में इजाफा होगा.

2. फंडिंग के फॉर्मूले में बड़ा बदलाव

केंद्र और राज्य के बीच में फंडिंग को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है. पहले मनरेगा में नियम के अनुसार मजदूरों को मिलने वाली 100% मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी. जबकि राज्य सरकारें मटेरियल और प्रशासनिक खर्च में एक फिक्स रेश्यो में खर्चा देती थीं. दूसरी तरफ विकसित भारत-जी राम जी एक्ट में कुल खर्च का 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार देगी, जबकि 40 फीसदी खर्च राज्य सरकार को अपनी जेब से देना होगा.

3. नॉर्थ ईस्ट राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्पेशल रूल

विकसित भारत-जी राम जी स्कीम में नॉर्थ ईस्ट के राज्यों जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और साथ में केंद्र शासित प्रदेशों के खर्च का 90 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार खुद उठाएगी. इन राज्यों को केवल 10 फीसदी अमाउंट ही देना होगा.

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4. दोनों स्कीम के विजन और उद्देश्य में बदलाव 

दोनों योजनाओं के विजन और उद्देश्य में भी एक बड़ा बदलाव साफ नजर आता है. मनरेगा में जहां अहम फोकस किसी भी तरह के गांव के इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सड़क, तालाब की खुदाई या खेतों को समतल करने पर था. जबकि, विकसित भारत-जी राम जी में सरकार का फोकस जल सुरक्षा पर है. इसके जरिए होने वाले ज्यादातर काम रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सिंचाई के संसाधनों को बेहतर बनाने से जुड़े होंगे. सरकार के अनुसार इससे रोजगार मिलने के साथ-साथ गांवों में पानी और सिंचाई का संकट हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा.

5. बेरोजगारी भत्ते के मामले में क्या बदलाव?

अगर आपने काम के लिए अप्लाई किया और सरकार काम नहीं दे पाती, तो फिर मुआवजे का नियम क्या है? इसके लिए बता दें कि नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. मनरेगा की ही तरह विकसित भारत-जी राम जी स्कीम में आवेदन करने के 15 दिनों के अंदर अगर किसी को काम नहीं मिलता है, तो उसे हर दिन का बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा. खर्च कौन उठाएगा?  इस भत्ते का पूरा खर्च राज्य सरकार को ही उठाना होगा. ये प्रोविजन इसलिए रखा है, जिससे लोकल एडमिनिस्ट्रेशन बिना किसी देरी के मजदूरों को काम मुहैया कराए.

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MGNREGA Allocation
VB GRAMG Scheme