Oil Price Hike Crisis Impact: कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे वैश्विक बाजारों का हाल बेहाल चल रहा है. बात अगर भारतीय बाजार की करें तो गुरुवार के दिन 22 महीने के बाद सबसे बड़ी गिरावट देखी गई. जंग के इस समय में मेटल से लेकर रुपया और शेयर मार्केट, हर तरफ गिरावट का दौर जारी है. ईरान-इजरायल जंग के बीच कच्चा तेला 116 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंचा है. तो चलिए इस खबर में आपको शेयर बाजार, रुपये की हालत के साथ सोने-चांदी की स्थिति के बारे में जानकारी देते हैं, जिनकी कच्चे तेल की कीमतों की वजह से चाल बिगड़ गई है.
Oil Price Hike Crisis Impact
मार्केट में 12 लाख करोड़ स्वाहा
गुरुवार का दिन बाजार में निराशा का माहौल लेकर आया. 22 महीनों के बाद आई दूसरी बड़ी गिरावट ने निवेशकों के पोर्टफोलियों को ऐसे कम किया जैसे आंधी में कोई झोंपड़ी उड़ जाती है. सेंसेक्स गुरुवार के दिन 2497 अंक (3.26%) टूटकर 74,207 के लेवल पर बंद हुआ. दूसरी तरफ निफ्टी भी 776 अंक लुढ़क कर 23,002 के लेवल पर आ गया. केवल एक दिन के कारोबार में निवेशकों के करीब 12 लाख करोड़ रुपये डूब गए. एक्सपर्ट के अनुसार बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर देखा गया. निवेशकों को डर है कि तेल के दामों में इजाफा होने से भारतीय कंपनियों की इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी होगी, जिससे उनका प्रॉफिट मार्जिन बिगड़ सकता है.
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सोने-चांदी में आई बड़ी गिरावट
शेयर बाजार एक तरफ, मेटल मार्केट दूसरी तरफ... ऐसा लग रहा है मानों एक दूसरे में होड़ लगी हुई है कि कौन सबसे ज्यादा गिरेगा. सेफ हेवन माने जाने वाला सोना-चांदी में से अब निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं. खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोना 8,195 की गिरावट के साथ 1,45,091 पर ट्रेड कर रहा था. वहीं चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा गिरावट देखी गई. 1 किलो चांदी की कीमत 18,194 रुपये की गिरावट के साथ 2,30,000 पर चल रही थीं. हालांकि कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर मेटल मार्केट पर नहीं पड़ता है पर डॉलर की मजबूती के साथ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी इसकी गिरावट की अहम वजह बनी. चांदी में आई ये बड़ी गिरावट उन निवेशकों के लिए बड़ा झटका है, जिन्होंने इसे हाई प्राइस पर खरीदा था.
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रुपया आज कितना गिरा
कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर भारतीय रुपये पर होता है. गुरुवार को भारतीय रुपया 25 पैसे कमजोर होकर 93.18 प्रति डॉलर के लेवल पर जा पहुंचा.दरअसल भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% इंपोर्ट दूसरे देशों से करता है. मतलब ये कि खरीदे हुए तेल का पेमेंट डॉलर में किया जाता है. ऐसे में तेल महंगा होने से डॉलर की डिमांड लगातार बढ़ रही है और रुपया अपनी मजबूती खो रहा है.














