Lenskart Owner not only Piyush Bansal: नासिक में TCS धर्मांतरण मामले के बीच एक और विवाद ने इन दिनों सबका ध्यान खींचा है- वो है आईवियर कंपनी लेंसकार्ट का ड्रेसकोड विवाद (Lenskart Row) . 'बुरके को हां, तिलक-टीके को ना' विवाद की शुरुआत हुई, सोशल मीडिया पर इंटरनल गाइडलाइन वायरल होने से, जिसमें आरोप लगाया गया कि कंपनी ने 'बुरका' या 'हिजाब' पहनने की अनुमति तो दी है, लेकिन कर्मचारियों के माथे पर 'तिलक' या 'टीका' लगाने पर पाबंदी लगाने की कोशिश की.
सोशल मीडिया पर 'Boycott Lenskart' हैशटैग ट्रेंड करने लगा तो कंपनी के को-फाउंडर पीयूष बंसल को सफाई देने आगे आना पड़ा. कंपनी ने नया ड्रेसकोड भी जारी किया है, जिसमें ये बताने की कोशिश की गई है कि लेंसकार्ट धार्मिक आधार पर भेदभाव के पक्ष में नहीं.
इतना सबकुछ होने के बावजूद सोशल मीडिया पर लेंसकार्ट विवाद की 'आग' पूरी तरह बुझी नहीं है. इस बीच लोग ये भी सर्च कर रहे हैं कि ये कंपनी आखिर है किसकी और इसमें किन लोगों का पैसा लगा है. आइए समझने की कोशिश करते हैं.
देश की सबसे बड़ी आईवियर रिटेलर कंपनी
लेंसकार्ट की शुरुआत साल 2010 में पीयूष बंसल, अमित चौधरी और सुमित कपाही ने की थी. पीयूष बंसल, जिन्हें लोग 'शार्क टैंक इंडिया' के जज के तौर पर घर-घर में जानते हैं, इस कंपनी का मुख्य चेहरा हैं. एक छोटे से स्टार्टअप से शुरू हुई ये कंपनी आज भारत की सबसे बड़ी आईवियर रिटेलर बन चुकी है, जिसकी पहुंच जापान और दक्षिण-पूर्व एशिया तक है. कंपनी के पास फिलहाल भारत में 2,000 से ज्यादा स्टोर्स हैं.
किन दिग्गजों का लगा है पैसा?
लेंसकार्ट ने 'यूनिकॉर्न' कंपनी के रूप में अपनी पहचान बनाई है. पिछले साल ये शेयर बाजार में लिस्ट भी हो गई. इसकी सफलता के पीछे दुनिया भर के बड़े निवेशकों का हाथ है. कंपनी ने अब तक कई राउंड में फंडिंग जुटाई.
- फाउंडर्स/प्रमोटर ग्रुप (Peyush Bansal, Neha Bansal वगैरह): बंसल भाई-बहन की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 14% से 16% के आसपास बताई जाती है. ESOP के ज़रिए इसे थोड़ा बढ़ाने की योजना भी बनी है.
- सॉफ्टबैंक (SoftBank): जापानी निवेश दिग्गज सॉफ्टबैंक इस कंपनी के सबसे बड़े शेयरधारकों में से एक है. करीब 16-20 फीसदी हिस्सेदारी के साथ ये कंपनी में सबसे बड़ा संस्थागत निवेशक है.
- रतन टाटा (Ratan Tata): दिवंगत दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा ने शुरुआती दिनों में ही लेंसकार्ट पर भरोसा जताया था. 2016 में रतन टाटा ने व्यक्तिगत स्तर पर पर्सनल/फैमिली ऑफिस (RNT Associates) के जरिए इसमें निवेश किया था. हालांकि 2021 में उन्होंने अपना स्टेक बेचकर एग्जिट कर लिया.
- अजीम प्रेमजी (Azim Premji): अजीम प्रेमजी की फैमिली‑ऑफिस इन्वेस्टमेंट फर्म प्रेमजी इन्वेस्ट की 2023–25 के बीच लगभग 11% के आसपास हिस्सेदारी बताई गई है. हालांकि उनके एग्जिट प्लान की भी खबरें सामने आई थीं.
- अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA): खाड़ी देश के इस सॉवरेन वेल्थ फंड ने साल 2023 लेंसकार्ट में भारी निवेश किया. प्राइवेट इक्विटी इनसाइट्स के अनुसार, इसने 10% हिस्सेदारी के लिए 500 मिलियन डॉलर का निवेश किया, जिससे कंपनी की वैल्युएशन 4.5 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गई.
- टेमासेक (Temasek): सिंगापुर की सरकारी निवेश कंपनी टेमासेक का भी इसमें बड़ा हिस्सा है. ये कंपनी के शुरुआती राउंड से ही निवेशक है. बाद में इसने 2023-24 में और पैसा डालकर हिस्सेदारी बढ़ाई. 2024 में Temasek और Fidelity ने मिलकर 200 मिलियन डॉलर की सेकेंडरी डील की.
- अन्य निवेशक (Other Investors): लेंसकार्ट में और भी कंपनियों का पैसा लगा है. इनमें केदार कैपिटल (Kedaara Capital), क्रिस कैपिटल (ChrysCapital), चिराते वेंचर्स, TR Capital, Alpha Wave Global/Incubation जैसे नाम भी शामिल हैं.
साफ है कि लेंसकार्ट किसी एक व्यक्ति या एक फैमिली की कंपनी नहीं है, बल्कि ग्लोबल पार्टनर और इन्वेस्टर्स वाला एक यूनिकॉर्न स्टार्टअप है.
विवाद का असर कंपनी के शेयरों पर भी
ताजा विवाद का असर कंपनी के शेयरों पर भी देखा गया. अभी कुछ ही दिन पहले की बात है, जब कंपनी के शेयरों ने रिकॉर्ड बनाया था. 15 अप्रैल को इंट्राडे में लेंसकार्ट के शेयर 559.80 रुपये का ऑल टाइम हाई बनाया था. विवाद और वीकेंड के बाद जब सोमवार को बाजार खुले तो मार्केट में तेजी के बावजूद कंपनी के शेयर 4% तक फिसल गए थे. पिछले सत्र में 534.85 के स्तर पर बंद हुए शेयर सोमवार को 530.05 पर खुले, लेकिन इंट्राडे के दौरान 508.70 तक गिर गए थे. बंसल की सफाई और नए दिशानिर्देश के बाद मंगलवार को रिकवरी देखने को मिली. शेयर 1.88 फीसदी के उछाल के साथ 542 रुपये के पार बंद हुए.
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