Israel-Iran War Impact on Copper: दुनिया में जब भी मिडिल ईस्ट में उठा-पटक होती है तो उसका रिजल्ट ग्लोबल मार्केट तक जा पहुंचता है. इजरायल और ईरान के बीच वॉर ने जहां सोने की कीमतों में इजाफे का संकेत दिया है, वहीं दूसरी तरफ कॉपर के भविष्य पर भी निवेशक अपनी नजरें जमाकर रखे हुए हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि अगर यह स्थिति एक फुल वॉर में बदलती है तो कॉपर की कीमतें ना केवल रिकॉर्ड तोड़ेंगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक अलग पहचान बना सकती हैं.
Israel-Iran War Impact on Copper
युद्ध और कॉपर का कनेक्शन
- युद्ध की कंडीशन में कॉपर के रेट बढ़ने के तीन बड़ी वजह हैं. पहला मिडिल ईस्ट दुनिया का सबसे बड़ा और जरूरी ट्रेडिंग रूट है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कोई भी सैन्य हलचल समुद्री व्यापार को ठप कर सकती है. इससे तांबे की शिपमेंट में देरी होगी और माल की कमी कीमतों को ऊपर ले जाएगी.
- दूसरी वजह है कि तांबे को निकालना और रिफाइनिंग एक एनर्जी इंटेंसिव प्रोसेस है. युद्ध से कच्चे तेल और गैस के दाम बढ़ेंगे, जिससे कॉपर प्रोडक्शन की कॉस्ट सीधे तौर पर बढ़ जाएगी.
- आखिर में तीसरी वजह है युद्ध के समय हथियारों, मिसाइलों और सैन्य हथियारों का प्रोडक्शन बढ़ जाता है. एक नॉर्मल मिसाइल से लेकर मॉर्डन टैंकों तक में बड़ी मात्रा में कॉपर का इस्तेमाल होता है, जो इसकी डिमांड को अचानक बढ़ा देता है.
क्या कहते हैं बाजार के आंकड़े?
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) में कॉपर पहले से ही अपने जलवे बिखेर रहा है. अगर इजरायल और ईरान के बीच टकराव लंबा चलता है तो एक्सपर्ट के अनुसार शॉर्ट टर्म में कॉपर 10% से 15% तक महंगा हो सकता है. वहीं भारतीय मार्केट की बात करें तो घरेलू बाजार (MCX) पर कॉपर के दाम 1500 रुपये प्रति किलो के स्तर को छू सकते हैं. अभी के समय में 1198 रुपये प्रति किलो के भाव से कॉपर एमसीएक्स पर ट्रेड कर रहा है.
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी कॉपर जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है. कीमतों में उछाल का मतलब है कि लैपटॉप, स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक कारों की कीमतें बढ़ सकती हैं. घर बनाना महंगा हो सकता है क्योंकि वायरिंग और प्लंबिंग में कॉपर का बड़ा रोल है. इसके साथ ही इंडस्ट्रियल इनपुट कॉस्ट बढ़ने से आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा.














