सोना खरीदने वालों की हुई मौज: अब UAE नहीं, इस देश से गोल्ड लाएगा भारत, धड़ाम से गिरेंगी कीमतें!

Gold Price Prediction 2026: भारत पहले ही अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका से तेल और गैस खरीद रहा है, और अब कीमती धातुओं को इसमें शामिल करना बाजार के लिए एक 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है.

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Gold Silver Price Drop: यूएई के बजाय अब अमेरिका से सोना-चांदी का आयात बढ़ाएगा भारत, सोना-चांदी की कीमतों में कमी आने की उम्मीद
नई दिल्ली:

सोना चांदी की खरीद करने वाले और निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आ रही है. भारत सरकार अपनी ट्रेड पॉलिसी में बड़ा बदलाव करने जा रही है. IANS की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार अब अमेरिका से भारी मात्रा में सोना और चांदी खरीदने की तैयारी कर रही है. अभी तक भारत अपनी इन जरूरतों के लिए मुख्य रूप से यूएई (UAE) जैसे देशों पर निर्भर था.

एक वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस कदम से न केवल घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कम होने की उम्मीद है, बल्कि अमेरिका के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस भी बेहतर होगा. 

क्या अमेरिका से सोना आने पर गिरेंगे दाम?

इस समझौते का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है. जानकारों का मानना है कि अमेरिका से सोने-चांदी का आयात बढ़ने से सप्लाई चेन और ज्यादा मजबूत होगी. जब सप्लाई बढ़ेगी और आयात शुल्क (Taxe) का गणित सही बैठेगा, तो बाजार में सोने-चांदी के दाम नीचे आ सकते हैं.

भारत पहले ही अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका से तेल और गैस खरीद रहा है, और अब कीमती धातुओं को इसमें शामिल करना बाजार के लिए एक 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है.

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से क्या होगा फायदा?

भारत और अमेरिका के बीच हुए इस द्विपक्षीय समझौते के तहत कई बड़ी राहतें दी गई हैं. करीब 10 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर लगने वाले शुल्क को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. इससे भारत के रत्न, आभूषण (Jewellery), टेक्सटाइल और लेदर जैसे इंडस्ट्री को अमेरिकी बाजार में बड़ी जगह मिलेगी.

अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता हमारे घरेलू उद्योगों और एमएसएमई (MSME) की सुरक्षा के साथ-साथ विदेशी निवेश को भी बढ़ावा देगा.

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डेटा सेंटर और टेक्नोलॉजी को मिलेगा बढ़ावा

यह समझौता सिर्फ सोने-चांदी तक सीमित नहीं है. इससे भारत के डेटा सेंटर इंडस्ट्री को भी बड़ी राहत मिलने वाली है. पहले एंटरप्राइज जीपीयू सर्वर पर 20 से 28 प्रतिशत तक भारी आयात शुल्क लगता था, जिससे भारत में डेटा सेंटर बनाना बहुत महंगा पड़ता था. अब शुल्क में कटौती के बाद यह लागत लगभग 14 प्रतिशत तक कम हो जाएगी. इसका मतलब है कि भारत अब टेक्नोलॉजी के मामले में सिंगापुर जैसे देशों को टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है.

जानकारों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ आपकी जेब को राहत देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे  ज्वेलरी, टेक्सटाइल और डेटा सेंटर जैसे बड़े उद्योगों को भी जबरदस्त फायदा होने वाला है.

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