India-Iran War Impact: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग ने कई बड़े देशों की अर्थव्यवस्था के लिए परेशानी खड़ी कर दी है. इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती टेंशन का असर अब भारत पर भी देखा जा सकता है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार इस जंग का असर भारत की महंगाई पर नहीं बल्कि देश की जीडीपी ग्रोथ पर हो सकता है. इस रिपोर्ट में आरबीआई की ब्याज दरों के बारे में बताया गया है, जिसका सीधा असर भारतीय नागरिकों की जेब पर पड़ता है.
गैस की सप्लाई रुकने से खतरा
रिपोर्ट बताती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी परेशानी कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ प्राकृतिक गैस की सप्लाई भी है. गैस की सप्लाई कम होने से भारतीय कंपनियां पहले ही इंडस्ट्रीज में इस्तेमाल होने वाली सप्लाई को कम करने में लग चुकी हैं.
कच्चे तेल की कीमतों का देश पर असर
सूत्रों के अनुसार अगर गैस की यह समस्या चार हफ्तों से ज्यादा लंबी चलती है तो इसका सीधा असर फर्टिलाइजर और पावर जैसे बड़े सेक्टरों पर हो सकता है. इससे अगली तिमाही की ग्रोथ रेट में गिरावट आ सकती है. वहीं अगर अगर कच्चा तेल $90 से $95 प्रति बैरल के बीच बना रहता है, तो भारत की 7% से ज्यादा रहने वाली प्रोजेक्ट ग्रोथ रेट कम होकर 6.5% पर आ सकती है.
महंगाई पर क्या खबर?
- अमूमन तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ती है लेकिन भारत के पास फिलहाल ऑप्शन मौजूद हैं. जैसे, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें सीधे तौर पर वैश्विक कीमतों के साथ नहीं बदलतीं. सरकार और तेल कंपनियां देश में कीमतों को कंट्रोल करती हैं.
- दूसरी बात यह कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर पार जाती हैं, तो सरकार जनता के लिए एक्साइज ड्यूटी कम कर सकती है. इस कदम से काफी हद तक आम नागरिक को राहत मिल सकती है.
- तीसरी बात यह कि भारत की रिटेल महंगाई जनवरी में 2.75% थी, जो RBI के 2% से 6% के दायरे में काफी नीचे है. सूत्रों का कहना है कि तेल कीमतों में 20% की बढ़ोतरी होने पर भी महंगाई की दर 5% के अंदर ही रह सकती है.
ड्यूश बैंक के अनुसार, अगर तेल की कीमतों में 10% से 20% की बढ़ोतरी का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाता है, तो महंगाई दर में 0.25% से 0.50% की वृद्धि हो सकती है.
गोल्डिलॉक्स फेज खत्म?
पिछले कुछ समय से देखा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था एक गोल्डिलॉक्स स्थिति यानी ना बहुत ज्यादा महंगाई, ना कम ग्रोथ में थी. लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि अगर यह जंग लंबी चलती है तो भारत के लिए यह कमाल का फेज खत्म हो सकता है.
ईएमआई होंगी सस्ती?
सिटीग्रुप के अर्थशास्त्री समीरण चक्रवर्ती ने कहा, जहां एक तरफ शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट उठा पटक का दौर है. रुपये ने रिकॉर्ड ऑल टाइम लो लेवल टच किया, वहीं आरबीआई फिलहाल सख्ती करने के मूड में नजर नहीं आ रहा. फरवरी की बैठक में आरबीआई ने दरें स्थिर रखी थीं. क्योंकि अभी महंगाई कंट्रोल में है, इसलिए रिजर्व बैंक ब्याज दरें बढ़ाने की गलती नहीं करेगा.
इसके उलट अगर ग्रोथ पर मामला फंसता है तो आरबीआई का फोकस ग्रोथ रेट को बचाने पर ज्यादा होगा. हालांकि, तेल की ऊंची कीमतों की वजह से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें भी फिलहाल अभी नहीं हैं. ऐसे में ईएमआई सस्ती होती हुईं अभी फिलहाल नजर नहीं आ रही हैं.













