Israel-Iran War: इजरायल, अमेरिका-ईरान युद्ध के पीछे का असली खेल समझिए

ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग से वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप है. होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें $85 के पार चली गई हैं, जिससे अमेरिकी तेल कंपनियों के मुनाफे में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है.

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अमेरिका और इजरायल के शनिवार को ईरान पर हमला करने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. इसका मतलब है कि तेल कंपनियों के मुनाफा बढ़ने की पूरी संभावना है. पर असली सवाल यह है कि क्या इस युद्ध से तेल कंपनियां तेल और गैस के नए प्रोजेक्ट्स में ज्यादा निवेश भी करेंगी? साथ ही इस जंग से अमेरिकी तेल कंपनियों की कमाई पर क्या असर पड़ने वाला है.

तेल कंपनियों की कमाई पर क्या पड़ेगा असर?

जब भी दुनिया में कोई भू-राजनीतिक संकट होता है और तेल की सप्लाई रुकने का डर पैदा होता है, तेल की कीमतें बढ़ती हैं और कंपनियों के मुनाफे भी उछल जाते हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भी ऐसा ही हुआ था. 2022 की तीसरी तिमाही में ExxonMobil और Chevron ने मिलकर 30 अरब डॉलर से भी ज्यादा कमाया था, क्योंकि उस समय तेल और गैस के दाम बढ़ गए थे.

मंगलवार को ब्रेंट तेल की कीमत थोड़ी देर के लिए 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई. यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतें भी 2023 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं. यह बढ़ोतरी इसलिए हुई क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य लगभग बंद है, जहां से दुनिया की लगभग 20% कच्चे तेल की सप्लाई गुजरती है. कतर ने LNG उत्पादन रोक दिया है, इसलिए गैस की कीमतें भी बढ़ीं. Again Capital के जॉन किलडफ के अनुसार, “ऐसी स्थिति में तेल उत्पादक कंपनियां जरूर फायदे में रहती हैं. इससे उनकी कमाई जरूर बढ़ेगी.” हालाँकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ऊंची कीमतें कब तक बनी रहती हैं.

क्या अमेरिकी कंपनियां बढ़ाएंगी निवेश?

एक्सपर्ट का कहना है कि कंपनियां तभी नए कुएं खोदेंगी या बड़ा निवेश करेंगी, जब उन्हें लगेगा कि यह सप्लाई रुकावट लंबे समय तक चलेगी. बड़े प्रोजेक्ट्स शुरू होने में महीनों या सालों का समय लगता है, इसलिए उन्हें स्थिर और लंबे समय तक ऊंची कीमतों का भरोसा चाहिए.  डैन पिकरिंग का कहना है कि "अगर होर्मुज़ लंबे समय तक बंद रहा तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं. लेकिन यह पक्का नहीं है.”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नेवी तेल टैंकरों का इस्तेमाल करेगी और अमेरिका शिपिंग को इंश्योरेंस देगा. यह घोषणा होते ही तेल की कीमतों में थोड़ा गिरावट आई. अगर अमेरिका, चीन या दूसरे देश अपनी आपातकालीन तेल भंडार बाजार में छोड़ देते हैं, तो कीमतें और गिर सकती हैं. फिलहाल बाजार मान रहा है कि यह एक शॉर्ट-टर्म समस्या है.

अमेरिकी तेल कंपनियों के मुनाफे पर क्या पड़ेगा असर?

हालांकि अमेरिकी तेल और गैस उद्योग इस स्थिति का लाभ उठा सकता है, पर वे इतनी जल्दी मिडिल ईस्ट की कमी को पूरी तरह भर नहीं सकते. कुछ सेक्टरों ने पहले ही फायदा देखना शुरू कर दिया है: अमेरिका के गल्फ कोस्ट रिफाइनर्स की कमाई बढ़ी है क्योंकि वहां प्रोसेस की गई पेट्रोल-डीज़ल की मांग बढ़ गई है. एलएनजी निर्यातकों को फायदा हुआ है.

लेकिन नया तेल निकालने या गैस उत्पादन बढ़ाने में समय लगता है.आमतौर पर महीनों से लेकर कई साल तक. विशेषज्ञों के अनुसार निवेश सबसे पहले वहीं जाएगा जहां जल्दी नतीजे मिलते हैं. जैसे अमेरिकी पर्मियन बेसिन. यहां कंपनियाँ पहले से काम कर रही हैं नए कुएं जल्दी तैयार हो जाते हैं. निवेश का फायदा जल्दी मिलता है. इसके अलावा वेनेज़ुएला में लंबे समय वाले प्रोजेक्ट्स जैसे गहरे समुद्र में ड्रिलिंग वाले प्रोजेक्ट्स मुनाफ कमा कर दे सकते हैं.

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